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इंजीनियरिंग टूल्स बेचते थे, उपनाम हो गया इंजीनियरवाला…

Posted on: 01 May 2018 09:58 by Praveen Rathore
इंजीनियरिंग टूल्स बेचते थे, उपनाम हो गया इंजीनियरवाला…

इंदौर. 120 साल से लोहा व्यापार से जुड़े परिवार की पहचान ही इंजीनियरवाला के नाम से हो गई। कालांतर में इस परिवार के युवा व्यापारी अमिर इंजीनियरवाला इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन (इल्वा) के अध्यक्ष रहे। इल्वा का गठन 1955 में इंजीनियरवाला परिसर में ही हुआ था। पुश्तैनी कारोबार इंजीनियरिंग टूल्स आदि का था। अमिरभाई दाऊदी बोहरा समाज के हैं, समाज में उपनाम नहीं होता है, इसलिए बिजनेस के आधार पर ही इनका उपनाम इंजीनियरवाला पड़ गया और इसी नाम से शहर और प्रदेश में पहचान बन गई। पिताजी कीकाभाई इंजीनियरवाला पेशे से वकील थे। आज भी अमिर इंजीनियरवाला लोहा व्यापार से जुड़े हैं, इल्वा की गतिविधियों में इनकी खास भूमिका रहती है, आप म.प्र. लोहा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे हैं। प्रस्तुत है घमासान डॉटकॉम से हुई बातचीत की मुख्य अंश… amir

सवाल : इल्वा में आप कब से जुड़े हैं?
जवाब : इल्वा से मैं शुरू से ही जुड़ा हूं। वैसे हमारी पैतृक फर्म एके इंजीनियरवाला 120 साल पुरानी संस्था है। पिताजी और अंकल यही कारोबार करते थे। 2005 से मैं संस्था से जुड़ा हूं। वैसे सदस्य तो शुरू से ही रहे हैं।

सवाल : इल्वा का गठन कब हुआ?
जवाब : यह एक व्यापारिक संगठन है। इसका गठन व्यापार में आने वाली समस्याओं के निदान के लिए 1955 में इंजीनियरवाला परिसर हाथीपाला पर ही हुआ था। तब 40 दस्यों के साथ शुरूआत हुई थी, आज 866  वैधानिक सदस्य हैं।

सवाल : इल्वा की ओर क्या गतिविधियां चल रही है?
जवाब : गरीब तबके को और सदस्यों के बच्चों के लिए क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए ट्रस्ट के माध्यम से 1981 में छोटे रूप में स्कूल का संचालन शुरू किया, आज दो हजार से ज्यादा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सन 2000 में कॉलेज शुरू किया गया। संस्था की करोड़ों की प्रॉपर्टी है। चार एकड़ में स्कूल-कॉलेज भवन है। इसके अलावा तीन तौल कांटे, संस्था का खुद का लोहामंडी में कार्यालय भवन है, जिसमें दुकानें भी हैं, जो किराए पर दे रखी हैं। इससे जो इनकम होती है, वह परमार्थ कार्य में लगाई जाती है।

सवाल : लोहा व्यापारी नई मंडी में शिफ्ट क्यों नहीं हो रहे हैं?
जवाब : 323 व्यापारियों को प्रशासन ने नई मंडी में प्लॉट अलॉट किए थे। जिन लोगों के प्लॉट हैं, उन्होंने वहां दो-दो लाख खर्च कर संपत्ति जमा करवाया, रजिस्ट्री करवाई और अपनी दुकानें बनवाई, 20 लाख रुपए तक इस पर निवेश किए गए। जिन व्यापारियों को वहां प्लॉट मिलें थे, लगभग सभी ने दुकानें वहां शिफ्ट कर दी है। वैसे अभी वहां इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, काफी सुविधाएं जुटाई जाना बाकी है।

सवाल : आपकी हॉबी क्या है?
जवाब : घूमना-फिरना, पत्र-पत्रिकाएं पढऩा, दोस्तों के साथ पिकनिक करना हॉबी है।

सवाल : परिवार में कौन-कौन है?
जवाब : परिवार में पत्नी, एक लडक़ा और एक लडक़ी है। लडक़ा बीई कर रहा है। मास्टर डिग्री के लिए जून में ऑस्ट्रेलिया जाने वाला है।

सवाल : व्यस्तता के चलते परिवार को कैसे समय दे पाते हैं?
जवाब : व्यापार की व्यस्तता के बीच परिवार को भी भरपूर समय देता हूं। वीक एंड परिवार के साथ ही मनाता हूं, फिर चाहे मूवी देखने जाना हो या पिकनिक पर जाना हो, परिवार के साथ ही जाता हूं।

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