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सितारों से सजी राजधानी पर लगी देश की निगाहें | Elections of the ‘Seventeenth Lok Sabha’ is in the discussion…

Posted on: 05 May 2019 14:30 by Surbhi Bhawsar
सितारों से सजी राजधानी पर लगी देश की निगाहें | Elections of the ‘Seventeenth Lok Sabha’ is in the discussion…

भारत की राजधानी वैसे तो किसी भी तरह से चर्चाओं की मोहताज नहीं है। कभी राज्य की सत्ता से कांग्रेस के बेदखल होने के कारण तो कभी आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के कारण और तमाम प्रयासों के बाद भी भाजपा के देखते रह जाने के कारण। कॉमनवेल्थ घोटाले ने भी दिल्ली को खूब चर्चाएं दी तो दिल्ली मेट्रो भी कम चर्चा में नहीं रही।

बहरहाल, सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में यहां से उतरी सितारों की फौज भी चर्चा में है। राजनीतिक जगत से बात शुरू करें तो तीन बार मुख्यमंत्री रही दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अब यहीं से संसद में जाना चाहती हैं। वे उत्तर-पूर्व दिल्ली से चुनाव मैदान में उतरी हैं। वहां उनका मुकाबला भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता व गायक मनोज तिवारी से होगा, जो फिलवक्त सांसद हैं।

इसके अलावा कांग्रेस के टिकट पर ही दक्षिण दिल्ली से ओलिंपियन विजेंदरसिंह भाजपा के सांसद रमेश विधूड़ी को चुनौती दे रहे हैं। पूर्वी दिल्ली से भाजपा के टिकट के साथ मैदान में आए क्रिकेटर गौतम गंभीर का मुकाबला कांग्रेस के स्थापित नेता अरविंद सिंह लवली से होना है। वहीं भारत सरकार में मंत्री रहे डॉ. हर्षवर्धन चांदनी चौक सीट से कांग्रेस के अनुभवी जयप्रकाश अग्रवाल के साथ मुकाबले में है। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए गायक हंसराज हंस को उत्तर पश्चिम दिल्ली के चुनावी मैदान में कांग्रेस के राजेश लिलोठिया से चुनौती मिलेगी।

दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष रहे अजय माकन नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र से भाजपा की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी के तर्कों का जवाब देंगे। दिल्ली में आप की मौजूदगी की चर्चा न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। आप के प्रत्याशियों की फेहरिस्त में चांदनी चौक से पंकगज गुप्ता, पूर्वी दिल्ली से आतिशी, दक्षिणी दिल्ली से राघव चड्ढा, नई दिल्ली से ब्रजेश गोयल, उत्तर पूर्वी दिल्ली से दिलीप पांडेय, उत्तर पश्चिमी दिल्ली से गूगन सिंह, पश्चिमी दिल्ली से बलवीर सिंह जाखड़ शुमार है।

कांग्रेस और आप में कोई तालमेल न हो पाने के कारण कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होगा। भाजपा खेमे को मोदी की लहर, कांग्रेस को राहुल के जोश भरे चुनाव अभियान और आम आदमी पार्टी (आप) को अपनी प्रदेश सरकार के जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर भऱोसा है। इन सबकी लोकप्रियता का फैसला भी १२ मई को होने वाले चुनाव ही करेंगे।

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