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अठ्ठाईस साल का बेबी, आलोक पुराणिक की कलम से-व्यंग्य

Posted on: 11 Jun 2018 10:57 by krishnpal rathore
अठ्ठाईस साल का बेबी, आलोक पुराणिक की कलम से-व्यंग्य

मेट्रो ट्रेन में इधर बीस बाईस वर्षीय युवती मोबाइल पर वार्तारत थी-सो सोना बेबी, माय क्यूट बेबी। हाऊ आर यू माय बच्चा। उधर से भी संवाद हो रहा था-कुच्ची पुची, सोना बेबी, क्यूट बेबी। दोनों साइड ही बेबीमय माहौल था।

पर कुछ के लिए कुछ चकरायमान माहौल बना कि बीस-बाईस साल की युवती के इतना बड़ा बच्चा कैसे, जिसे वह बेबी बेबी किये जा रही है और वह उधर से घनाघन संवाद किये जा रहा है, करीब आधा घंटा सोना, बेबी होता रहा।

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सामाजिक तौर पर एक जागरुक ने आशंका जाहिर कि जरुर इस युवती का बाल विवाह हो गया होगा, तब ही इसके इतना बड़ा बेबी है। मेट्रो के अगले स्टेशन पर वह बेबी भी चढ़ लिया ट्रेन पर, बेबी कोई अठ्ठाईस तीस साल का रहा होगा। बेबी के बाप की उम्र का बंदा बेबी हो रहा था।

आगे संवाद चला तो वह पुरुष बेबी इस लड़की को भी बेबी कहने लगा। बेबी टू बेबी संवाद चला। बेबी संबोधन अब जेंडर न्यूट्रल हो लिया है। किसी को भी बोल दो बेबी। सचमुच के बेबियों को आपत्ति करनी चाहिए कि कैसे कैसों को बेबी कहा जा रहा है। बेबी माना जा रहा है। सुबोध नामक पच्चीस वर्षीय युवक फोन पर कुछ इस तरह के शब्द निकाल रहा था-ऊं ऊं ऊं माय बेबी कुच्ची कुच्ची। उधर से भी ऐसे ही संवाद आ रहे थे-किन्नू किन्नू चिन्नू चिन्नू बेबी।

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कुच्ची कुच्ची चिन्नू चिन्नू- मां बाप ने सुबोध नाम रखा होगा यह सोचकर कि चलो बोधपूर्वक जीवन चलेगा इसका। यह तो नाम तक का भरभंड किये दे रहा है। नामों को लेकर विकट समस्याएं खड़ी हो गयी हैं। तीस के साल के जवांमर्द शोना बाबू हुए जा रहे हैं। तीस साल की सुंदरियां बेबी हुई जा रही हैं। पार्क में तीन साल का बच्चा-लवली बेबी सुनकर सिर घुमाये और चाकलेटातुर हो जाये, तो उसे पता चलता है कि बेबी तो किसी तीस वर्षीय दाढ़ीधारी को कहा जा रहा है, जिसकी अर्हता बाबा होने की है, पर बेबीगिरी मचाये हुए है।

इश्क में बेबीमय हो जाता है सब।

इश्क में बेवकूफियां इंतहा पर होती हैं, वैसी बेवकूफियां जैसी बेबी कर सकता है। प्रेमी में बेबी की बेवकूफियों की छवि देखना या प्रेमी में बेवकूफ बेबी तलाशना प्रेम का परम लक्ष्य है। प्रेमी अक्ल का बेवकूफ हो और गांठ का पूरा हो, तो प्रेम घणी दूर तक जाता है। कोई एक अक्लमंद निकल जाये, तो लड़ाई झगड़े शुरु हो जाते हैं। इसलिए अब के नौजवान प्रेम में एक दूसरे को बेबी बाबू बोलते हैं। उम्मीद रहती है कि दो ढाई साल के लेवल वाली हरकतें ही करना। शोना बाबू शाणा बन जाये, तो आफत। ऐसे ही बेबी ज्यादा सवाल जवाब करे, तो आफत खड़ी हो जाती है।

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चतुर सावित्री अब यमराज को बेवकूफ यह कर बनाती-यमराज तुम तो सत्यवान को लेने आये हो न। यहां तो सिर्फ शोना बाबू हैं। यमराज भी चकराते -हां दरवाजे के पीछे आधे घंटे से खड़ा होकर सुना तो मैंने भी शोना बाबू ही। गलत एड्रेस पर आ गया, लगता है।

कनफ्यूजन विकट है। जनगणना में कहीं ये आंकड़ा ना आ जाये कि मुल्क की नब्बे प्रतिशत जनसंख्या बेबी ही है। बेबीप्रधान लव कर राखा।

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