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डॉ. जयंतीलाल भंडारी ने शौक को ही बना लिया करियर

Posted on: 07 May 2018 11:07 by Praveen Rathore
डॉ. जयंतीलाल भंडारी ने शौक को ही बना लिया करियर

इंदौर में जन्मे और पले बड़े हुए अर्थशास्त्री एवं करियर काउंसलर डॉ. जयंतीलाल भंडारी ने घमासान डॉटकॉम से विशेष चर्चा में कहा कि उन्होंने जीवन में अपने शौक को ही करियर बना लिया। उन्होंने 1975 में दो प्रतियोगी परीक्षाएं दी, संयोग से दोनों में ही उनका चयन हो गया, लेकिन वे प्रशासनिक अधिकारी नहीं बनphoto of Dr.jlbhandari-2ते हुए प्राध्यापक बनें और आज प्रदेशभर में लाखों नौजवनों को करियर मार्गदर्शन दे रहे हैं। अपने शौक को ही उन्होंने कर्म बना लिया और 40 साल से इसी काम को मिशन मानकर आज भी कर रहे हैं। प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के अंश…
सवाल : करियर की शुरुआत कब और कैसी हुई?
जवाब : 1975 में एमकॉम करने के साथ करियर की शुरुआत हुई। तब मैंने दो प्रतियोगी परीक्षा दी थी, एक प्रशासनिक पदों के लिए और दूसरी कॉमर्स व्याख्याता के लिए। संयोग से दोनों ही परीक्षा में मेरा चयन हुआ। तब मैंने प्रशासनिक अफसर नहीं बनते हुए व्याख्याता बनने का निर्णय किया। करीब 4 दशक पहले करियर काउंसलिंग के विकल्प नहीं होते थे, तब मैंने निर्णय लिया कि प्राध्यापक के साथ-साथ करयिर के लिए काम करेंगे। मेरी पहली नियुक्ति शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में अगस्त 1976 में हुई। मेरा सपना करियर मार्गदर्शक बनने का ही रहा। कॉलेज के समय मेरी क्लासेस पैक होती थी। 1976 से ही कॉलेज में माह में एक-दो सत्र करियर काउंसलिंग के लिए प्रोग्राम करते रहे। इसमें सौ से ज्यादा छात्र शामिल होने लगे। धीरे-धीरे करियर मार्गदर्शन प्रोग्राम का लाखों छात्रों को लाभ हुआ। अब तक हजारों करयिर काउंसलिंग प्रोग्राम में छात्रों को मार्गदर्शक दिया। कॉलेज में पढ़ाने के साथ-साथ करियर मार्गदर्शन की विधा को आगे बढ़ाने का मिशन बन चुका था। सन 1976 के बाद से अब तक ये सिलसिला जारी है।

सवाल : अब तक कितने छात्रों को मार्गदर्शन दिया?
जवाब : करियर काउंसलिंग का मेरा शौक रहा है। 1976-77 से आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज में नौकरी करते हुए छोटे रूप में शुरुआत की थी, यहीं से मार्गदर्शन लेकर राजकुमार सोलंकी डिप्टी कलेक्टर बनीं बाद में आईएएस बनी फिर कमिश्नर तक पहुंची। इसी कॉलेज के अशोक भार्गव डिप्टी कलेक्टर बने और आशुतोष अवस्थी भी डिप्टी कलेक्टर बने, जो प्रिंसीपल सेक्रेटरी तक पहुंचे। इनके अलावा भी सैकड़ों स्टूडेंट कॉलेज में रहकर मार्गदर्शन लेकर कई छात्र प्रदेश और देश में ऊंचे ओहदे पर पदस्थ हैं।

सवाल : करियर काउंसलर के रूप में आपको अवॉर्ड भी मिले?
जवाब : 1980 में पीएचडी और उसके बाद शिक्षा के क्षेत्र में कॉमर्स में डिलीट की उपाधि दी गई। यूसीजी ने भी अवॉर्ड देकर सम्मानित किया।

सवाल : प्रतियोगिता निर्देशिका का प्रकाशन कब शुरू किया?
जवाब : 1984 में पत्नी मीना भंडारी ने प्रतियोगिता निर्देशिका का प्रकाशन शुरू किया। इस पत्रिका में आज तक न तो कमर्शियल और न सरकारी विज्ञापन छापते हैं। इसमें केवल करियर संबंधी विषयों पर ही सामग्री होती है। 1991 के पूर्व करियर मार्गदर्शन का कोई माध्यम नहीं था, तब मैंने इंदौर के अग्रणी अखबार नईदुनिया में मार्गदर्शन नाम से कॉलम लिखना शुरू किया, इसमें छात्रों के कई प्रश्न आते रहे हैं, उनका जवाब प्रकाशित होता रहा।

सवाल : और आप किन क्षेत्रों में सक्रिय हैं और अब मीडिया में क्या भूमिका रही?
जवाब : सरकार ने मुझे डेपुटेशन पर भविष्य निधि संगठन का सलाहकार बनाया गया। नई दिल्ली में तीन साल काम किया। इस दौरान कई नेशनल अखबारों से जुड़ा और वहां के बड़े अखबारों में मेरे आर्थिक विषयों पर लेख छपने लगे। इनमें नवभारत टाइम्स, जनसत्ता, पत्रिका, भास्कर, पंजाब केसरी, राष्ट्रीय सहारा, म.प्र. शासन के रोजगार निर्माण सहित अन्य पत्र-पत्रिकाओं में आर्थिक विषयों व करियर पर लेख प्रकाशित हुए। अब तक साढ़े तीन हजार से ज्यादा आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। वहीं दूरदर्शन के भोपाल केंद्र से मार्गदर्शन कार्यक्रम भी शुरू किया गया, जिसमें मेरी सहभागिता रही। इन सब चीजों से दो लाख से ज्यादा स्टूडेंट अब तक लाभांवित हो चुके हैं। मैंने म.प्र. शासन की विवेकानंद योजना भी बनाई है, जिसमें 2008 तक मैं डायरेक्टर रहा। इस योजना के तहत ढाई हजार करियर काउंसलर तैयार किए। राज्य सरकार इस योजना को नंबर वन योजना बनाती है।
अभी आप क्या कर रहे हैं?

सवाल : अब आपका सपना क्या है?
जवाब : 2008 में मैंने सर्विस में वीआरएस ले लिया। मैंने करियर मार्गदर्शन अभियान को पूरे देश में फैलाने के लिए १२ साल पहले वीआरएस ले लिया। मेरा उद्देश्य और सपना यही है कि मैं करियर के क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभांवित कर सकूं। इसमें इतना काम करने के बाद भी लगता है कि समुद्र में बूंदभर पानी जितना ही काम हुआ है, अभी बहुत कुछ संभावनाएं हैं।

सवाल : आपकी पारिवारिक प्रष्टभूमी क्या है?

जवाब : नासिक के पास चांदवाड़ में गुरुकुल की स्थापना के लिए जिन पांच लोगों का योगदान रहा, उनमें मेरे पिताजी अनोखीलालजी भंडारी का भी महत्वूपर्ण योगदान है। मेरी पत्नी प्रतियोगिता पत्रिका का प्रकाशन कर रही है। बेटे सौरभ ने अमेरिका में पढ़ाई की और वहां कुछ दिन काम करने के बाद वापस स्वदेश लौट आया, अभी स्वयं की आईटी कंपनी प्लेयर आईटी सॉल्यूशंस प्रालि का संचालन कर रहे हैं। बेटी मेघा बोहरा की शादी हो चुकी है, वह एमबीए गोल्डमेडलिस्ट हैं।

सवाल : आपकी दिनचर्या कैसी है?
जवाब : पांच बजे उठना, घर के बगीचे में पक्षियों के लिए दाना-पानी डालना फिर मॉर्निंग वॉक करने के बाद शिव मंदिर और दादावाड़ी जैन मंदिर जाता हूं। एक घंटा अखबार पढऩा उसके बाद एक्रोपोलिस कॉलेज जाता हूं। यहां मैं डायरेक्टर हूं। लंच के बाद प्रतियोगिता निर्देशिका व आर्टिकल के लिए काम करता हूं। शाम को ४ से ६ बजे तक स्टूडेंट को करियर काउंसलिंग करता हूं। इसके बाद शहर में करियर के लिए होने वाले सेमीनार आदि में वक्ता के रूप में शामिल होता हूं। रात साढ़े दस बजे सोता हूं।

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