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आयुष्मान को होम्योपैथी का चमकता सितारा बनाना चाहते हैं डॉ गंगराड़े दंपती

Posted on: 04 Jun 2018 12:40 by Praveen Rathore
आयुष्मान को होम्योपैथी का चमकता सितारा बनाना चाहते हैं डॉ गंगराड़े दंपती

इंदौर. आयुष्मान होम्योपैथिक सेंटर आज न सिर्फ इंदौर बल्कि प्रदेशभर में जाना जाता है। डॉ. विशाल गंगराड़े और उनकी पत्नी डॉ. रीना गंगराड़े ने 2001 में उस समय होम्योपैथी चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखा, जब बहुत कम लोग इस पर विश्वास करते थे। इन दो दशक में कई उतार-चढ़ाव आए। जैसे पहली बार बैंक से लोन लेकर जहां बिल्डर से क्लिनीक खरीदा था, वह अवैध निकला, जो बाद में तोड़ दिया गया, चूंकि उस पर लोन लिया था, वह भी चुकाना पड़ा, इस तरह आय के स्त्रोत पूरी तरह समाप्त हो गए, इस बीच एक बड़े चिकित्सा संस्थान में मेडिकल आफिसर की नौकरी की, इतना संघर्ष करने के बाद भी डॉ. गंगराड़े ने हिम्मत नहीं हारी क्योंकि हर कदम पर उनका साथ देने वाली पत्नी डॉ. रीना उनका हौंंसला बढ़ा रही थीं। बता दें कि डॉ. विशाल गंगराड़े घुटनों का दर्द, स्लिप डिस्क, साईटिका, गठिया वाय, बालों का झडऩा, मुहांसे के अलावा बगैर सर्जरी के पाइल्स, प्रोस्टेट ग्रंथी का इलाज करते हैं, वहीं उनकी पत्नी डॉ. रीना गंगराड़े (रघुवंशी) मोटापा कम करना और स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। बगैर सर्जरी के मोटापा कम करने आपको महारत हासिल है. सेकड़ों लोगों का  मात्र एक माह के कोर्स में 5 किलो तक वजन व् कमर कम करने में आपने सफलता प्राप्त की हे. स्कीम  54 में  क्लिनीक संचालित कर रहे हैं वहीं वे आयुष्मान को ब्रांड बनाना चाहते हैं। वे निकट भविष्य में आयुष्मान सेंटर का इंदौर व भोपाल में विस्तार करने वाले हैं। IMG-20180604-WA0000

सवाल : होम्योपैथी चिकित्सा क्षेत्र में कब से काम कर रहे हैं?
जवाब : 2001 में मैंने स्कीम नं. 78 से एक छोटे से क्लिनीक से जीवन की शुरुआत की। उस दौरान साथ-साथ नौकरी भी की। 2009 में आनंद बाजार में क्लिनीक शुरू किया। वह बिल्डिंग अवैध बनाया गया था, जो बाद में तोडऩा पड़ा। दरअसल बिल्डर ने हमारे साथ फ्रॉड किया था, क्लिनीक बेसमेंट में था, जो टूट चुका था, उस पर बैंक से लोन लिया था, वह चुकाना पड़ा, आर्थिक परेशानी आ गई। काफी उतार-चढ़ाव आए, नौकरी की, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। चूंकि मेरी पत्नी भी डॉक्टर है, उन्होंने मेरा हर कदम पर साथ दिया। फिर नइ पारी की शुरुआत स्कीम 54 में आयुष्मान होम्योपैथिक सेंटर से की, जहां अब तक हजारों मरीजों का इलाज कर चुके हैं।

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सवाल : होम्योपैथी चिकित्सा क्षेत्र में काम करने का निर्णय कैसे लिया?
जवाब : मेरे पिताजी की खंडवा के पास बोरगांव में छोटी सी किराने की दुकान है। आर्थिक स्थिति औसत ही थी। 1994 में मैं इंदौर पढऩे के लिए आया। फिर पीजी के लिए मुझे औरंगाबाद जाना पड़ा। चूंकि पिताजी का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं, मैंने प्रयास भी किया, लेकिन कुछ मार्क्स कम आये, इसलिए  एमबीबीएस नहीं कर पाया।2003 में हमारी शादी हुई। फिर हमने हौम्योपेथी में काम करना शुरू किया। मेरी पत्नी डॉ. रीना गंगराड़े भी मेरे साथ ही प्रेक्टिस करती हैं।

लाइफ स्टाइल ने युवतियों में बढ़ाई समस्या : डॉ. रीना गंगराड़े
डॉ. रीना गंगराड़े बताती हैं कि आज की जीवनशैली और खानपान की वजह से युवतियों में बांझपन की समस्या हो रही है। फास्ट फूड के कारण अंडाशय में गठान होने से ये प्रॉब्लम ज्यादा बढ़ जाती है, जो बाद में बांझपन का कारण बन जाती है। इस तरह की शिकायतें ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में सामने आ रही है। इसलिए महिलाओं व युवतियों को जीवनशैली और खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए, कुछ भी समस्या हो तो तुरंत समय रहते चिकित्सा परामर्श लें ताकि आगे चल कर गंभीर समस्या का सामना नहीं करना पड़े।

डॉ गंगराड़े पिछले 18 वर्षों से होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से मोटापा कम करना, हाईट का न बढऩा, बच्चेदानी की गठान, निसंतानता आदि का उपचार कर रही हैं।

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