इंदौर : सरकारी अस्पताल से डॉक्टर गायब, मरीज हुए अभद्रता का शिकार | Doctor Missing from Government Hospital, Groaning Patients

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इंदौर, (शिवानी राठौर) : मध्यप्रदेश की मिनी मुंबई कहे जाने वाले और देश के सबसे साफ़ शहर के रूप में अपनी पहचान बनाने वाला शहर इंदौर सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के मामले में बहुत पीछे है। यहां सरकारी अस्पताल तो बहुत है लेकिन वहां के डॉक्टर गायब है। जबकि अस्पताल खुलने का समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक का लिखा गया है, उसके बावजूद वहां कोई महिला डॉक्टर मौजूद नही थी। ऐसे में लगता है सुविधाओं के नाम पर डॉक्टर सिर्फ सरकार का पैसा खा रहे है और यह अस्पताल कामों में जीरो है यहां तक कि इस नवनिर्मित सरकारी अस्पतालों में पानी तक का इंतजाम नहीं है।

जी हां, हम बात कर रहे है इंदौर शहर के बाणगंगा क्षेत्र स्थित नवनिर्मित सरकारी सामुदायिक केंद्र की, जहां अपना हाल ठीक करवाने आए मरीजों का हाल अस्पताल में आकर बेहाल हो रहा है। आपको बता दे कि इस सरकारी अस्पताल में किसी भी तरह की व्यवस्था का इंतजाम नही किया गया है।

अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की लाइन लगी रहती है लेकिन डॉक्टर का कोई पता नहीं रहता। पूछने पर महिलाओं को बदतमीजी से जवाब दिया जाता है। इलाज कराने आई महिलाओं का कहना है कि इस अस्पताल में कोई सुनने वाला नहीं है ना ही यहां कोई नर्स है जो हमारी मदद कर सके।

एक महिला ने बताया वह दो दिनों से इस सरकारी अस्पताल के चक्कर काट रही है लेकिन वहां डॉक्टर का कोई पता नहीं है। जब महिला ने पूछताछ काउंटर पर डॉक्टर के आने के बारे में पूछा तो जवाब मिला ‘आप यहां लिखें गए नंबर पर कॉल कर लीजिये’। जब उस परेशान गर्भवती महिला ने कॉल किया तो इस अस्पताल के रूम नंबर 3 में अपनी सेवाएं देने वाली डॉ. सुनीता यादव ने उनके साथ कॉल पर अभद्र व्यवहार किया। साथ ही सरकार के नाम पर भी दाग लगाया और कहा कि सरकार ने मेरी यहां ड्यूटी नहीं लगाई है’ यह कॉल नंबर इमरजेंसी के लिए है।

सरकारी अस्पतालों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सरकार आखिर इन पर ध्यान क्यों नहीं देती? सरकारी अस्पताओं में डॉक्टर्स के ऐसे जवाब और असुविधाओं पर सरकार को गौर करना चाहिए और ऐसे डॉक्टर के खिलाफ भी कार्रवाई करना चाहिए जो सरकारी अस्पतालों में अपनी ड्यूटी देने की बजाय अपने क्लिनिक पर बैठकर सिर्फ पैसा कमा रहे है। अगर इंदौर जैसे शहर के सरकारी अस्पतालों के यह हाल होंगे तो आसपास के गांवो के बारें में सोच पाना तो बहुत ही मुशकिल है।

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