जापानीओं की तरह कही आपको भी तो नही ‘टीयर टीचर’ की जरूरत

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benefits of crying

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि स्वस्थ रहने के लिए हंसना और रोना दोनों ही आवश्यक है. रोने से आपका मन हल्का हो जाएगा और आप अपने आपको काफी फ्रेश महसूस करेंगे. जापान में दफ्तरों और स्कूलों में लोगों को रोने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और ट्रेनिंग के लिए ‘टीयर्स टीचर्स’ भी नियुक्त किए जा रहे है.

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अगर आप दर्द को छुपाते हैं तो अपनी आदतों को बदल डालिए क्यों की खुशी और दुख के आंसुओं से तनाव घटता है. निप्पन मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर जुंको उमिहारा कहते हैं, “तनाव से लड़ाई में आंसू सेल्फ डिफेंस की तरह है”.

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टीयर्स टीचर्स कहते हैं वह देश भर में लोगों को रोने के फायदों के बारे में जागरुक कर रहे हैं. आप अगर तनाव में है तो रोना, हंसने और सोने से भी ज्यादा असरदार है. इसीलिए टीयर्स टीचर्स योशिदा ने रोने के फायदों पर जागरुकता फैलाने के लिए 2014 में कैंपेन लॉन्च किया थे. जापान ने 2015 में 50 से ज्यादा कर्मचारी वाली संस्थाओं के लिए के लिए ‘स्ट्रेस चेक प्रोग्राम’ अनिवार्य कर दिया था.

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1990 तक डिप्रेशन के मुद्दे पर खुले तौर पर ज्यादा चर्चा नहीं होती थी. अब दूसरे देशों के साथ जापान ने हाल के कुछ वर्षों में मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना शुरू किया है. सैकड़ों लेक्चर और ऐक्टिविटीज करा चुके योशिदा के मुताबिक, यह जरूरी है कि रुलाने वाली या भावुक करने वाली किताबों, संगीत को आजमाया जाए और ऐसी ही फिल्मों का फायदा उठाया जाए वह कहते हैं, “अगर आप सप्ताह में एक बार रोते हैं तो आप तनावमुक्त जिंदगी जी सकते हैं”.

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आंसू भी तीन प्रकार के होते हैं, रेफलेक्सिव, कंटीनिअस, इमोशनल. केवल इंसान ही तीसरी तरह से रो सकते हैं. इमोशनल क्राइंग बहुत ही फायदेमंद है.अगर हंसना सेहत के लिए अच्छा है तो रोना भी सेहत के लिए खराब नहीं होता है. हंसने के जितने फायदे हैं, उससे कम रोने के भी नहीं हैं.

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अल्जाइमर रिसर्च सेंटर रीजन्स हॉस्पिटल फाउंडेशन के डायरेक्टर, विलियम के मुताबिक, हम रोने के बाद इसलिए अच्छा महसूस करते हैं क्योंकि इससे तनाव के दौरान उत्पन्न हुए कैमिकल्स बाहर निकल जाते हैं.हम जब भी तनाव में होते हैं, और रोते हैं, तो आसुओं के साथ एड्रेनोकार्टिकोट्रोपिक और ल्यूसिन जैसे हार्मोन निकलते हैं. जिससे हमें तनाव से मुक्ति पाने में मदद मिलती है.

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आप ध्यान दें तो पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में हार्ट की समस्या कम होती है. इसके पीछे मेरे ख्याल से सबसे बड़ी वजह है रोना. गौर करने वाली बात है कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा खुल कर रो लेती है. जिससे उनका मन हल्का हो जाता है. जबकि वहीं पुरुष अपने दर्द को दबा कर रखते हैं. जल्दी रो नहीं पाते. कहीं ना कहीं उनमें हर्ट की समस्या बढ़ने का ये भी एक बड़ा कारण हो सकता है.

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