झड़ते हुए बालों को रोकने के लिए करें ये उपचार, नहीं तो सकती है ये बीमारी

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण इंसान अपने लिए और अपने शरीर के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है। अव्यवस्थित खान पान के कारण आजकल लोगों में बालों से सम्बंधित परेशानियां बढ़ गई है।

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hair fall

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण इंसान अपने लिए और अपने शरीर के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है। अव्यवस्थित खान पान के कारण आजकल लोगों में बालों से सम्बंधित परेशानियां बढ़ गई है। दरअसल, इसका कारण शहर का प्रदूषण, धूल, धुवां और दूषित भोजन-पानी है। इस सबके कारण सिर से लेकर पांव तक त्वचा रुखी हो जाती है। रुखी त्वचा से जहां, डैंड्रफ और बालों से संबंधित अन्य रोग होते हैं वहीं यह चर्म रोग का कारण भी बन सकता है।

बता दे कि अचानक गंजापन और बालों का झड़ना किसी बीमारी का कारण हो सकता है, इसलिए आपको तुरंत डॉंक्टरी सलाह लेनी चाहिए। आजकल महिलाओं में भी यह समस्या काफी दिख रही है। इस बीमारी को डॉ एलोपेसिया कहते हैं। तो चलिए जानते जानते है क्या होता है एलोपेसिया और कैसे इसे ठीक किया जा सकता है।

पहले एसा कहा जाता था की गंजापन सिर्फ पुरशो को ही होता है लेकिन आज कल ये महिलाओं में भी आम बात हो गई है। ये हार्मोनल चंजेस के कारण होता है। दरअसल, फोलीसाइल सिकुड़ने लगते हैं तो बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं और वहां गंजापन आ जाता है। महिलाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। कई बार इसी समस्या के चलते लम्बे और मोटे बाल, छोटे और पतले बालों में बदल जाते हैं। महिलाओं में एकदम से कभी भी गंजापन नहीं आता। पहले उनके बाल झड़ते हैं, पतले होते होते है और बाद में गंजापन आ जाता है।

एलोपेसिया के उपचार का सबसे पहला चरण है लक्षणों के आधार पर इसकी पहचान। इस दौरान मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का पूरा ब्यौरा लिया जाता है। गंजेपन का पैटर्न, सूजन या संक्रमण का परीक्षण, थायरॉइड और आयरन की कमी की पहचान के लिए ब्लड टैस्ट और हार्मोनल टैस्ट आदि की मदद से इसकी जांच हो सकती है। इसके उपचार के लिए इन दवाओं और विधियों का इस्तेमाल स्थिति की गंभीरता के आधार पर किया जाता है।

योगासन : व्रजासन, पवन मुक्तासन, उष्ट्रासन और शीर्षासन करें। उक्त आसनों के विलोम आसन भी किया जाना चाहिए। उसके बाद प्राणायाम में नियमित रूप से अनुलोम-विलोम का अभ्यास करें।

योगा पैकेज: प्रदूषण से बचें। यौगिक आहार को जानें। वज्रासन के बाद कुर्मासन करें फिर उष्ट्रासन करें। पवनमुक्तासन के बाद मत्स्यासन करें फिर कुछ देर विश्राम करने के बाद शीर्षासन करें। आसनों को करने के बाद अनुलोम-विलोम प्राणायम करें और फिर पांच मिनट का ध्या

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