क्या है ये खेल समझ नहीं आ रहा,पर अब लगता है कुछ तो करना पड़ेगा

0
14

क्या है ये खेल समझ नहीं आ रहा,पर अब लगता है कुछ तो करना पड़ेगा,जांच के नाम पर लूट कब तक चलेगी। कल मेरी 3 साल की बेटी की तबियत खराब हुई डॉ माहेश्वरी जी को बताया पीलिया की शंका को देखते हुए डॉ सर ने पीलिया की जांच कराने को कहा।

आज सुबह बंसल लेबोरेट्री निजातपुरा में गया डॉ सर का पर्चा दिखाया पता चला 770 रु लगेंगे लैब वाले से पूछा इतने पैसे कैसे तो वो बोला चेरिटेबल चले जाओ वहां 200 रु लगेंगे,में थोड़ा गुस्से में वहां से निकल गया फिर लाइफ लाइन लैबोरेट्री गया वहां पर्चा देखते ही वो बोला 770 रु(में समझ गया कि बंसल से शायद फ़ोन आगया होगा) फिर नई सड़क स्थित नागर पैथोलॉजी गया वहां 470 रु में मैने मेरी बिटिया की जांच कराई।

मुझसे रहा नहीं गया मेने नगर लैब वाले को सब बताया तो उसने मुझे बताया कि बहुत लंबा खेल है साहब हमारे यहाँ से किसी भी डॉ को कमीशन नहीं जाता इसलिए हमारे यहाँ ये जाच सस्ती पड़ती है।

अब बात करते है कि आगे क्या-
कैसे इन चीज़ों को रोका जाए? कैसे ये गोरख धंधा ख़तम हो?

क्यों हम सभी को ये पता होते हुए भी हम कुछ देर के लिए घुस्सा होकर अपने काम पर लग जाते है?

क्यों हमारी ज़िबां पर ताला लग जाता है जब डॉ ऐसी भाषा में परचा लिखता है जो हमें समझ नहीं आती सिर्फ मेडिकल और लैब वाले को समझ आती है…..क्या हम उसी वक़्त chडॉ को नहीं बोल सकते की ऐसा लिखो की हम भी पड़ सके….।
कोई डॉक्टर या पैथोलॉजी वाला है जिनका ईमान साफ़ हो कृपया अपनी राय दे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here