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पश्चिम के पड़ोसी देश से सहानुभूति की उम्मीद मत रखो

Posted on: 19 May 2018 17:26 by Lokandra sharma
पश्चिम के पड़ोसी देश से सहानुभूति की उम्मीद मत रखो

सीमा पर जाकर लड्डू देने से ना तो सुरक्षा मजबूत होगी न शांति मिलेगी मदान

इंदौर 19 मई. भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल विजय मदान ने कहा है कि भारत को पश्चिम के अपने पड़ोसी देश से सहानुभूति की उम्मीद नहीं रखना चाहिए. देश की सीमा पर जाकर सैनिकों को लड्डू दे देने से ना तो सुरक्षा मजबूत होगी और ना ही शांति मिलेगी.

वह आज शाम यहां जाल सभागार में अभ्यास मंडल की 59वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे. उनका विषय था पड़ोसी देशों के संदर्भ में हमारी रक्षा चुनौतियां. उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जिन्ना द्वारा अंग्रेजों का खुलकर साथ देने के उपकार का बदला अंग्रेजों ने पाकिस्तान का गठन कर दिया. उस समय जो पाकिस्तान निहत्था था आज उसकी हालत यह है कि वह हमसे आंखें लड़ा रहा है. अमेरिका ने आजादी के बाद के इन सालों में पाकिस्तान का जो साथ दिया उसी ने पाकिस्तान को इतना बलशाली बनाया है. आज पाकिस्तान हमें परमाणु हथियार का डर दिखा रहा है. हम किसी भी परिस्थिति से जूझने में सक्षम है. यह विश्वास हमारे देश के नेताओं ने देश के अंदर ही कभी भी पैदा ही नहीं होने दिया यही कारण है कि पाकिस्तान इस तरह की आंखें तरेर रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत हमेशा सभी को खुश करने के प्रयास में लगा रहा लेकिन यह हकीकत है कि आप सभी को खुश नहीं रख सकते हैं. आपको अपना फोकस उन लोगों पर करना होगा जिन्हें खुश रखना आपके लिए फायदेमंद है. इस बात को उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इजराइल हमारे लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है लेकिन हमेशा हमने इजराइल से दूरी बनाने में ही अपनी भलाई समझी है. किसी नेता के बेटे को नेता बनना कर कुर्सी पर बिठा देने से देश नहीं चलता है. उन्हें सीमा पर जाकर यह देखना चाहिए कि स्थिति क्या है और इस स्थिति में देश को करना क्या चाहिए. आजादी के बाद हमारे देश में ऐसी नीतियां बनी जिससे कि यह स्पष्ट लगता है कि हम भ्रमित बहुत ज्यादा है और कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं.

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उन्होंने कहा कि देश के अंदरूनी मामले हो या अन्य देशों के साथ संबंधों के मामले हो दोनों मोर्चों पर हमारे देश की सरकार की नीतियां भ्रमित ही ज्यादा रहती है. पश्चिम दिशा के देश से हमें किसी भी हालत में सद्भावना की उम्मीद नहीं करना चाहिए हमें उससे लड़ना ही होगा लेकिन अब विश्व में खुले युद्ध का दौर नहीं है इसलिए जिस तरह चल रहा है उसी तरह से चलाना होगा. देश की सरकार को यह अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि सीमा पर जाकर लड्डू दे देने से देश की सुरक्षा नहीं होती है और शांति भी नहीं आती है. अंग्रेजों के समय भारत में आंतरिक सुरक्षा का कोई मुद्दा नहीं था लेकिन इस समय आंतरिक सुरक्षा भी हमारे सामने एक बड़ा मुद्दा है. कहीं माओवाद के नाम पर तो कहीं नक्सलवाद के नाम पर जो कुछ हो रहा है इसमें पड़ोसी देशों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. उन देशों को भी यह मालूम है कि हमारे देश में अंदरूनी सुरक्षा में क्या हो रहा है. इस स्थिति में वह भी हालात का फायदा उठाने में पीछे नहीं रहते हैं.

व्याख्यान के पश्चात हुए प्रश्न उत्तर के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि चीन हमसे बहुत आगे निकल गया है. हमें यह समझ लेना चाहिए कि चीन से लड़ना अच्छी बात नहीं है. हमें उसके साथ दोस्ती निभानी पड़ेगी. सैन्य शक्ति में वह हमसे बहुत आगे हैं और अर्थ शक्ति में तो वह खुद एक बड़ी शक्ति बन गया है. हमें अपनी सेना पर विश्वास रखना चाहिए. इस बात का गर्व है कि सेना के अंदर कोई भी व्यक्ति किसी भी पद पर हो वह धर्म अपने घर निभाता है. आपकी ड्यूटी पर राष्ट्र की ही बात करता है. कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथि का स्वागत माला ठाकुर निधि जोशी संतोष व्यास ने किया. अतिथि का परिचय कर्नल आशीष मंगलू ने दिया. संचालन सुनील मकोड़े ने किया. अतिथि को स्मृति चिन्ह रमेश मित्तल कुलाधिपति मेडिकैप्स विश्वविद्यालय भेंट किया. अंत में आभार प्रदर्शन अजीत सिंह नारंग ने किया.

आज का व्याख्यान

अभ्यास मंडल की 59 की ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में कल रविवार को प्रातः 10:30 बजे देश के पूर्व मानव संसाधन एवं विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी का व्याख्यान होगा. भूमंडलीकरण समस्याएं और समाधान विषय पर संबोधित करेंगे.

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