आजम की उस टिप्पणी को उर्दू की नफासत से न जोड़ें!

आजम पर कार्रवाई जो भी हो, यह तय है ‍कि बोली गई जबान और मंशा के बीच तालमेल न हुआ या जानबूझकर दोनो के कनेक्शन अलग रखे गए तो हालत आजम खान जैसी होती है।

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azam khan

अजय बोकिल

देश की संसद में अपनी ‘बदजुबानी’ के लिए बुरे फंसे आजम खान को शायद पहली बार अहसास हुआ होगा कि महिलाअों से भद्दा मजाक भी कितना महंगा पड़ सकता है। सदन की कार्यवाही के दौरान आसंदी पर विराजमान महिला स्पीकर रमा देवी को लेकर की गई बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद तमाम महिला सांसदों ने पार्टी लाइन से हटकर आजम खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अभद्रता के इस शोर में आजम की पत्नी ताजीन फातिमा का तर्क है कि यह सब आजम खान को संसद में बोलने से रोकने की साजिश के तहत हो रहा है। दरअसल आजम खान की उर्दू बहुत अच्छी है। उर्दू भाषा में ऐसी मिठास है जिसकी वजह से ऐसा लग रहा है कि उन्होंने कुछ गलत कहा है। वह (आजम) ऐसे नहीं हैं, उन्हें जया प्रदा के मामले में भी फंसाया गया था।’

दरअसल आजम खान भारतीय राजनीति की ऐसी शख्सियत हैं, जिनके लिए विवादों में बने रहना गुटखा फांकते रहने के समान हैं। अगर विवाद उनका पीछा छोड़ दें तो आजम खान की हैसियत शायद जीरो हो जाए। फर्क इतना है कि कभी विवाद आजम खान को ट्रेस कर लेते हैं तो कभी आजम खान खुद विवादो को न्यौता देते दिखते हैं। ‘अंगद-रावण संवाद’ की तरह अमरसिंह के साथ आजम का वाक् युद्ध तो भारतीय राजनीति के इतिहास की ‘अमर कथा’ है। इन सबके पीछे भी एक महिला जयाप्रदा का नाम लिया जाता है।

इस बार मामला जरा संगीन है। क्योंकि आजम सीधे स्पीकर रमा देवी से उलझ गए। गुरुवार को तीन तलाक बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान आजम खान जब बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने पूछा कि मुख्तार अब्बास नकवी कहां हैं ? इस पर स्पीकर ने कहा कि वह इधर-उधर की बात न करें बल्कि चेयर को संबोधित करते हुए बोलें। इसके बाद आजम ने मनचले अंदाज में आसंदी पर मौजूद महिला सभापति पर अभद्र टिप्पणी कर दी। हालांकि यह टिप्पणी बाद में कार्यवाही से विलोपित कर दी गई। लेकिन इसने सभी दलों की महिला सांसदो को भड़का दिया।

उन्होने एक स्वर में नारी सम्मान की रक्षा तथा आजम खान को सदन से निकालने की जोरदार मांग की। इसका पुरूष सांसदो ने भी समर्थन किया। आजम खान ने आसंदी को लक्ष्य कर जो टिप्पणी की थी, उसका रिश्ता आंखों से और आंखों द्वारा और आंखों के लिए था। केन्द्रीय मंत्री और सांसद स्मृति ईरानी ने गुस्से से भरे अपने भाषण में इशारा किया कि ‘मेरे सात साल के संसदीय कार्यकाल में आज तक किसी पुरुष ने सदन में इस तरह की हिमाकत नहीं की। यह विषय केवल महिला का नहीं है। यह महिला ही नहीं, पुरुषों का भी अपमान है।’ स्मृति ने कहा कि यह ऐसा सदन नहीं कि जहां पुरुष किसी महिला की आंखों में झांकने के लिए आते हैं। इसे पूरे देश ने देखा है कि कैसे यह सदन शर्मसार हुआ। हम चुपचाप बैठकर मूकदर्शक नहीं बन सकते।

केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जो शब्द उन्होंने (आजम खान) ने कहे हम उन्हें दोहराना भी नहीं चाहेंगे। यह सिर्फ महिला का अपमान नहीं बल्कि उस महिला का भी अपमान है, जो स्पीकर की भूमिका में है। बीजेपी सांसद संघमित्रा मौर्या ने कहा कि हमें आजम खान का इस्तीफा नहीं, माफी चाहिए। बीएसपी चीफ मायावती ने ट्वीट किया कि आजम की टिप्पणी महिलाअों की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली है। कांग्रेस ने पूरा मामला एथिक्स कमेटी के पास भेजने का सुझाव दिया तो टीएमसी सांसद मिमी चक्रवर्ती ने कहा कि संसद में कोई खड़ा होकर एक महिला से यह नहीं कह सकता कि मेरी आंखों में देखकर बात करें।

आजम पर कार्रवाई जो भी हो, यह तय है ‍कि बोली गई जबान और मंशा के बीच तालमेल न हुआ या जानबूझकर दोनो के कनेक्शन अलग रखे गए तो हालत आजम खान जैसी होती है। भले ही उसका ‍िमजाज ‘उर्दू की तरह’ हो। जैसा कि आजम के बचाव में उनकी बीवी ने कहा। वे भूल गई कि उर्दू अपमान की नहीं सम्मान की भाषा है। उर्दू की नफासत का आलम यह है कि वह काने को सीधे तौर पर काना नहीं कहती। लेकिन आजम ‘इधर उधर की बात न करने का आग्रह करते हुए ऐसा कुछ कह गए, जो उनकी उमर को भी शोभा नहीं देता। दरअसल आजम खान सियासत दान हैं और नेता जो कहते या करते हैं, उसका असली मकसद कुछ और होता है। आजम आंसदी के बहाने अपने आशिकाना मिजाज की झलक देना चाहते थे, लेकिन वो यह भूल गए कि न तो वह ऐसा मौका था और न ही दस्तूर। वैसे भी सियासत और आशिकी का ‍रिश्ता दूर का ही है। सियासत में तो आंखे मिलाने और आंखें चुराने का खेल एक साथ चलता है। लेकिन नीयत अगर साफ न हो तो आंखों के इशारे भी कुछ और संदेश देने लगते हैं। ऐसे में वो ‘उर्दू’ भी उसका कोई बचाव नहीं कर सकती, जो खुद घायल होकर भी दूसरे की जान बचा लेती है। उर्दू तो रिश्तों को जोड़ने वाली और खुशबू से भरी जबान है। गुलजार ने कहा भी है ‘वो यार है जो खुशबू की तरह, हो जिसकी जुबां उर्दू की तरह…!

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