जानें दिवाली की रात काजल बनाने का महत्व

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दिवाली का माहौल शुरू हो गया है। धर—धर में तैयारियां चल ​रही है। आज रूप चतुर्दशी यानि छोटी दिवाली है। रूप चतुर्दशी के अगले दिन दिवाली का त्यौहार है। इस दिन भगवान राम चौदह साल का वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनकी आने की खुशी मे घरों में घी के दिए जलाए थे। महा लक्ष्मी की पुजा की जाती है। मां लक्ष्मी के प्रवेश के लिए घरों में रंगोली बनाई जाती हैं।

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दिवाली पर काजल का महत्व

दिवाली के दिन रातभर दिये जलाए जाते है। दिये की ज्योत जलने से जो कालापन इकठ्ठा होता है,उससे काजल बनाया जाता है। इस काजल को घरों के बुजुर्ग और सभी लोग आंखो में लगाते है। साथ ही इस काजल को घर की अलमारी,तिजोरी और खाना बनाने की जगह पर लगाया जाता है। इससे घर में बर्कत बनी रहती है और सभी बाधाएं दुर होती है। इस काजल को आंखो में लगाने से आंखो में हो रही जलन कम हो जाती है साथ ही आंखो को सुरक्षित भी रखती हैं।

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