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व्यंग लेख – देश की शानदार लेडीजें…

Posted on: 11 Jan 2019 17:19 by mangleshwar singh
व्यंग लेख – देश की शानदार लेडीजें…

के.पी. सक्सेना

चुनांचे, अब मैं हाजिर हूं, लंबा अर्सा गायब रहा! रीजन? वही मैच फिक्सिंग…अब आप से क्या पर्दा! मैं भी खूब खेला हूं। गली, मुहल्ले..छत, बालकनी। जवानी का आलम था, मूंछ कडक़ती थी। कहां कहां नैना चार हुए, कहां साढ़े तीन रह गये (उनके डेढ़) वक्त बीत गया। अब कोई गड़े मुर्दे उखाड़ दे कि के.पी. भी मैच फिक्सिंग में शामिल हुआ करते थे। केस सी.बी.आई. को सौंप दे। इन दिनों, आप जानो, सी.बी.आई. ही माई बाप है। जो मिला वहीं, पहलौठी की औलाद की तरह, सी.बी.आई. की गोद में धर दिया।

मैं डरता हूं! लालू प्रसाद जैसी तरावट होती तो बात अलग थी। ६ महीने अंदर…६ महीने बाहर। आदी हो गये हैं। मेरा बाप भी कभी जेल नहीं गया। सो मैं लुका-छुपी करता रहा कि सी.बी.आई. के हत्थे न चढ़ जाऊं। खैर! ‘पद्मश्री’ मिली, तो डर कम हुआ। अब मूंछ कटाकर कांटेबाजी के अखाड़े में हाजिर हूं। मुझे पुन: झेलिये।

सो जनाबो, एक हैं दीपा मेहता। पिछले दिनों ‘वाटर’ नाम की फिल्म बनाने को पिल पड़ी और पेट्रोल छितराय के धर दिया। काफी लप्पा डुग्गी हुई और नतीजा यह निकला कि उत्तर भारत में, मई-जून में लोग वाटर को तरस गये। जहां चरन पड़े संतन के, तहां-तहां भया बंटा धार। यानी कि मारा घुटना, फूटी आंख। वही दीपा जी अब बोली है-‘भारत का सब से बड़ा लोकतंत्र होने की बात बकवास है। उसके बुद्धिजीवी रीढ़ विहीन हैं।’ …सत्य वचन, मैंन जी। किस ने कह दिया कि भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है? हम कहें, सबसे छोटा है।

लिफाफे में डालकर लोकतंत्र जेब में रख लो। बड़े तो यहां के फिल्म वाले हैं। हनुमान जी छाप। ज्ञान और गुण के सागर। कल्चर के अब्बा। अस्मिता की अम्मी। रही बात बुद्धिजीवियों के रीढ़ विहीन होने की, सो भी सच है। बुद्धि बल्कि डबल हड्डी उनके पास है, जो विवाद खड़े करते हैं…भावनाओं से खेलते हैं। खामोश पड़े भूसे में आग लगाते हैं। … जय हो!

अल्ला सलामत रखे इस देश की मैडमों को। जो बात की, खुदा की कसम, लाजवाब। एक है अरुंधति राय। बुक पर बुकर्स प्राइज, विजेता सो फरमाया है कि -‘गुजरात में ५३७ बांध हैं। ५३८वां बांध बनने से ही वहां का जलाभाव दूर होगा।’ यह ५३८वां सरदार सरोवर बांध है। आपने भी ठीक कहा मैना। पर वह उधर नर्मदा परियोजना के मंत्री जय नारायण व्यास कह रहे हैं-‘सरदार सरोवर अब गुजरात के लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। इसलिए भी इसका निर्माण जरूरी है।…’ कांटेबाज की बड़ी इल्लत है। किधर से बोले? मैन जी की हां में हां मिलाए, या भय्या जी की। सो प्यारे लाल, चुप ही रहो।

लेडीजों में एक और शानदार लेडी है राबड़ी देवी, केयर ऑफ लालू प्रसाद। खुदा सलामत रखे, सिर्फ नौ अदद बच्चों की मां हैं, मगर उनकी गौरमेंट जो है सो परिवार नियोजन की दीवानी है। सरकार अब कई जगहों पे कंडोम बिक्री की मशीनें लगवाने पर सोच रही है। उधर परिवार कल्याण मंत्री ऑफ बिहार का कहना है कि पुरुष कंडोम खरीदने में शरमाते हैं। बेचारे पुरुष! होते ही शरमीले हैं। कांटेबाज की तरह। बिला वजह ही शर्मा जाते हैं। वैसे कभी कहा गया था कि शर्म औरतों का जेवर है। अब मर्दों का है। नौजवान लडक़ों के कानों में बुंदे, गले में लॉकेट नहीं देखे आपने? अब सिर्फ बिछिया-पायल पहनना बाकी है। अल्ला वह दिन भी दिखाए।

हां, एक अर्ज और करनी थी आपसे। अब कांटेबाज जरा कांटा बदल रहे हैं। पहले एक पर्सनाल्टी या पर्सनाल्टे पर कांटेबाजी करते थे। अब टोटल परिदृश्य और खास वचनों पर कंटिया फेकेंगे। जो फंसेगा, आपके हवाले कर देंगे। मजा आने की गारंटी। बाकी सुराख तो हर जगह है, भय्ये हो सकता है कांटे में फंसे और सुराख से निकल जाए।

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