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क़ाबिलियत का कीचड़ स्नान

Posted on: 07 Jan 2019 14:33 by Mohit Devkar
क़ाबिलियत का कीचड़ स्नान

कीर्ति राणा

उज्जैन कलेक्टर होने के कारण सरकार ने मनीष सिंह और कमिश्नर एमबी ओझा का तुरंत तबादला कर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार के चेहरे पर लगे कीचड़ को साफ करने का काम इतनी तेजी से किया है कि भाजपा इसे मुद्दा बनाने से चूक गई।उज्जैन कलेक्टर मनीष सिंह और संभागायुक्त एमबी ओझा को हटाकर शंशाक मिश्रा को कलेक्टर उज्जैन और अजीत कुमार को कमिश्नर पदस्थ किया है। कमलनाथ सरकार के इस क्विक एक्शन से ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप तो है ही मैदानी अफसरों को भी समझ आ जाएगा कि यदि वे मलाईदार पदों पर बने रहना चाहते हैं तो उन्हें भी सरकार की तरह हर वक्त एक्शन मोड में रहना होगा, मंत्रियों के फोन भी उठाने होंगे। अब वह राज गया जब सीएम हाउस की पूजा से सारी मन्नतें कुबूल हो जाती थी।

इस कीचड़ स्नान कांड में मनीष सिंह ने दोषियों पर उतनी तेजी से कार्रवाई नहीं की जितनी फुर्ती भोपाल ने दिखाई। प्रदेश के मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने इस मामले में तत्परता दिखा कर सरकार को विधानसभा में किरकिरी से भी बचा लिया है।
मनीष सिंह की गिनती काबिल आयएएस में होती रही है, यही वजह रही कि बाकी कलेक्टरों को हटाने के बाद भी उन्हें यथावत रखा था लेकिन क्षिप्रा में पानी नहीं होने और शनिश्चरी अमावस्या पर स्नान को जुटे श्रद्धालुओं को कीचड़ के छींटे शरीर पर डालने का दंड उन्हें मिला है।

मनीष सिंह की तमाम क़ाबिलियत अपनी जगह लेकिन उज्जैन के धार्मिक महत्व और स्नान पूर्व क्षिप्रा में जल की पर्याप्त व्यवस्था पर नजर न रख पाना उनकी गैर ज़िम्मेदारी मानी गई है जबकि इस प्रशासनिक चूक के लिए उनसे अधिक ज़िम्मेदार तो एनवीडीए के अधिकारी हैं। यह माना जाए कि मनीष सिंह और एमबी ओझा से तो कार्रवाई की शुरुआत हुई है, अब बड़े पैमाने पर उज्जैन में प्रशासनिक बदलाव होगा जिनमें एनवीडीए के अधिकारियों में रजनीश वैश्य से लेकर संजय जोशी तक का नंबर आना तय है। आईएएस रजनीश वैश्य के मुंह लगे इंदौर के कार्यपालन यंत्री संजय जोशी और उज्जैन के कुछ स्थानीय अधिकारियों का भी कीचड़ स्नान तय है।उज्जैन के इस शिप्रा-कीचड़ मामले में असली जिम्मेदार तो वैश्य और उनसे अधिक संजय जोशी हैं।

ओंकारेश्वर से उज्जैन के लिए नर्मदा का पानी व्हाया बड़वाह से पम्प द्वारा उज्जैनी पहुंचता है। उज्जैनी से नर्मदा-शिप्रा का संगम होकर पानी उज्जैन जाता है। बड़वाह में पानी रोकने-छोड़ने का दायित्व संजय जोशी का है। उन्होंने लापरवाही नहीं बरती होती तो कीचड़ स्नान की नौबत नहीं आती। बिना चेतावनी दिए भूतड़ी अमावस पर पानी छोड़ने पर शिवराज सरकार के वक्त जनहानि भी हो चुकी है। इस कीचड़ स्नान की नौबत को टाला जा सकता था, समन्वयन की जिम्मेदारी कलेक्टर की थी, लेकिन वे अपने मातहत पर भरोसे में निपट गए।संभाग आयुक्त ओझा तो पूर्व आयुक्त रवींद्र पस्तोर जितने भी सक्रिय आज तक नजर नहीं आए। नतीजतन, बड़े स्नान पर्व पर श्रद्धालु परेशान हो गए।इतनी ही सख्त कार्रवाई आईएएस रजनीश वैश्य,कार्यपालन यंत्री संजय जोशी, उज्जैन के अन्य प्रशासनिक अधिकारियों पर भी होना चाहिए।

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