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हमारे घर के दरवाजे कभी किसी के लिए बंद नहीं होते हैं | Digvijay Singh’s wife Amrita Singh poignant appeal to the Bhopal People

Posted on: 11 May 2019 22:48 by Surbhi Bhawsar
हमारे घर के दरवाजे कभी किसी के लिए बंद नहीं होते हैं | Digvijay Singh’s wife Amrita Singh poignant appeal to the Bhopal People

भोपाल। भोपाल लोकसभा के कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह ने मतदान एक दिन पहले भोपाल के लोगों के नाम एक मार्मिक अपील जारी की है। देखिए क्या लिख रही है अमृता सिंह।

प्रिय साथियों,
पहली बार जब इस शहर आई उस वक्त से ही एक जुड़ाव सा हो गया था भोपाल से……और फिर चुनाव के दौरान जो समर्थन मिला तो इस शहर से जज्बात का नाता बन गया। इस चुनाव में आपने जो सहयोग दिया, जो समर्थन दिया .. खासतौर पर महिला मित्रों के लिए मैं दिल से आभार व्यक्त करती हूं… आपसे मिला प्यार और अपनापन ये जीवन भर की पूंजी है मेरे लिए….

जिनसे जज्बात का, जीवन का नाता जुड़ जाता है…..उनकी दुख तकलीफ, उनकी मुश्किलें संघर्ष सब साझा हो जाता है….अब आपके हर सुख दुख में मेरी साझेदारी है….. आप आज अपने और अपने शहर से जुड़ा एक बेहद अहम फैसला करने जा रहे हैं…..वोट करने की घड़ी है ये….आपका एक वोट उम्मीदवार से पहले आपके लिए हो….आपके रोजगार, तरक्की और शहर की रफ्तार के लिए हो…. भोपाल की देखभाल आने वाले पाँच साल में कौन करेगा, ये आपको तय करना है। विकल्प आपके सामने हैं।

एक ओर मेरे पति दिग्विजय सिंह हैं, जिन्होंने शादी के बाद ही मुझे कह दिया था कि हमारे घर के दरवाज़े कभी किसी के लिए बंद नहीं होते…कोई इस दरवाज़े से निराश नहीं लौटना चाहिए…. उनकी सोच है कि नेता सबका प्रतिनिधि होता है। पक्ष हो या विपक्ष, सभी लोग अपने हैं । दूसरी तरफ़ वो हैं, जो सिर्फ़ अपने-पराए के भेद की भाषा ही जानते हैं।

बात केवल निजी रिश्तों की नहीं सवाल तो भोपाल के भविष्य का है। है।झील की तरह गहरा-शांत-सुंदर शहर…..जहां के बाशिंदों की मोहब्बत और तहज़ीब इस शहर की पहचान है….आज भोपाल के लोग गर्व से कहते हैं कि हम भोपालवासी हैं। मेरी बस यही कामना है कि इस शहर को कभी किसी की नज़र ना लगे। यहाँ शांति रहे, अमन चैन रहे। आप जानती तो हो, घर में कलह हो जाए तो तरक्की रुक जाती है… हमारा समाज, हमारा शहर भी हमारे घर का विस्तार ही तो होता है।

एक बात और कहना चाहती हूँ आपसे… हम सांसद चुनते हैं अपने क्षेत्र के विकास के लिए। लेकिन विकास तब होगा जब चुनाव सही हो…विकास वही कर सकता है कि जिसके पास ज्ञान हो, अनुभव हो, जिसे ये समझ हो कि सिस्टम काम कैसे करता है, जिसकी बात का वज़न हो, जो देश विदेश में अपनी पहचान के बल पर संसाधन जुटा सके, जो आपसे नियमित संवाद के साथ आपकी समस्याओं को समाधान तक पहुंचा सके….. प्रशासन और विशेषज्ञों से सलाह लेकर शहर को तरक्की के पंख लगा सके….

ना कि सांसद उसे बनना चाहिए, जिसके बोलने पर ही एहतियातन पहरा लगा दिया गया हो। जो आपके भविष्य के लिए नहीं, अपने निजी इतिहास को उजला करने के लिए चुनाव लड़ रही हो….एक स्त्री होने के नाते स्त्री के हर न्यायपूर्ण संघर्ष का आदर!! ..लेकिन एक नागरिक होने के नाते जज्बात का नहीं, क़ानून का आदर है! कानून और संविधान का सम्मान ज़रूरी है।

फ़ैसला आपको करना है, क्योंकि चुनाव में आप किसी उम्मीदवार के भविष्य का फ़ैसला नहीं करते, अपनी और अपने बच्चों की तकदीर का फैसला करते हैं….मुझे यकीन है कि आप इस बार अपना हाथ मजबूत करेंगे…… सही उम्मीदवार चुनेंगे।

आपकी,
*अमृता सिंह*

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