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दिग्गी ने कमलनाथ को लिखा पत्र, माखनलाल चतुर्वेदी वि.वि.में बह रही है भ्रष्टाचार की गंगा

Posted on: 06 Mar 2019 19:11 by Surbhi Bhawsar
दिग्गी ने कमलनाथ को लिखा पत्र, माखनलाल चतुर्वेदी वि.वि.में बह रही है भ्रष्टाचार की गंगा

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को भोपाल की माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हो रही अनियमितताओं की लोकायुक्त, ई ओ डब्ल्यू और विभागीय जांच कराए जाने को लेकर पत्र लिखा है। इसमें दिग्विजय सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय दो दशकों से संचालित है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय में साल 2004 के बाद बड़ी संख्या में शैक्षणिक व्यक्ति और प्रशासनिक अनियमितताएं की साथ ही अध्यादेशओं और निर्देशों का हर स्तर पर उल्लंघन किया गया।

भर्ती में हुआ भ्रष्टाचार

दिग्विजय सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, अधिकारियों की भर्ती मैं खुलकर अनियमितता, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार किया गया। इसी तरह नोएडा, ग्वालियर, दतिया, अमरकंटक, रीवा एवं खंडवा में जो केंद्र खोले गए हैं वहां भी अनियमितताएं की गई है।

नियमों का दुरुपयोग

विश्वविद्यालय के नियमों को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि राज्य सरकार के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, विश्वविद्यालय अधिनियम, भर्ती आरक्षण नियम, रोस्टर क्रय नियम यात्रा, नियम भंडार नियम, आचरण नियम, नियंत्रण वर्गीकरण एवं अपील नियम आदि का लगातार दुरूपयोग हुआ।

ऊंचे दामों में खरीदी गई जमीन

दिग्विजय सिंह कहा कि नोएडा, रीवा, दतिया और भोपाल में विश्वविद्यालय के केंद्र बनाने के लिए जमीनों के लिए करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया। तत्कालीन मंत्रियों को खुश करने के लिए जमीनों को ऊंचे दामों में खरीदा गया।

नियुक्तियों में हुआ भ्रष्टाचार

पत्र में दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझे बताया गया है कि शिक्षकों की सभी नियुक्तियों, पदोन्नति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और निर्धारित नियमों एवं चयन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। मनमाने तरीके से चहेतों की नियुक्तियां कर दी। नियुक्तियों में यू.जी.सी के पीएचडी रेगुलेशन 2009 का भी उल्लंघन किया गया है।

आरक्षण के नियमों का नहीं हुआ पालन

दिग्विजय सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में SC-ST एवं महिलाओं के लिए मध्य प्रदेश शासन के आरक्षण नियम का पालन नहीं हुआ है। ऐसे में जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

पत्रकारिता कोर्स पर नहीं है विशेष ध्यान

आश्चर्य जताते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह विश्वविद्यालय मूलत: है। हिंदी पत्रकारिता पर विशेष फोकस के साथ पत्रकारिता, जनसंचार एवं सहबद्ध क्षेत्रों में अध्ययन और परीक्षण के लिए राष्ट्रीय केंद्र के रूप विकसित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। आश्चर्य की बात तो यह है कि यहां 90 फीसदी छात्र डीसीए और पीजीडीसीए के लिए पंजीकृत है, जबकि मात्र 9 फ़ीसदी से कम मीडिया से संबंधित कोर्स से जुड़े हैं।

कमलनाथ से दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस मामले में तत्कालीन कुलपति, महापरिषद के अध्यक्ष एवं सदस्य भी दोषी है। इनके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही होनी चाहिए। इसे गंभीरता से देखते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने के लिए निर्देश दें।

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