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चुनाव का मंडप में रायतो किन्ने ढोल्यो!

Posted on: 03 Nov 2018 09:18 by Ravindra Singh Rana
चुनाव का मंडप में रायतो किन्ने ढोल्यो!

तीन चार दिन पहले से व्हाट्सएप पर एक फोटो वॉयरल हो रहा था ‘होकम रायतो कदी ढोरोगा!’ संयोग कैसा बना कल दिल्ली में राहुल गांधी के सामने (दिग्गी) राजा और (सिंधिया) महाराजा में झगड़े की खबर वॉयरल हुई, रात तक दोनों की सफाई आ गई और शुक्रवार की शाम तक चुनाव मंडप में रायता भी ढुल (फैला दिया) गया। दिग्गी समर्थक माने जाने वाले पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू बेटे अजीत को कंधे पर बैठा कर कोने में खड़ा शिवराज का जन आशीर्वाद यात्रा वाला रथ दिखाने निकल पड़े।

ये 66 सीटों वाला मालवा निमाड़ क्षेत्र एक तरह से कांग्रेस में दिग्विजय के टोने टोटके के असर में माना जाता है।कहा तो यह भी जा रहा है कि प्रेमचंद गुड्डू ने आज जो यह फैसला किया है, करीब दो साल पहले भी वो दीनदयाल भवन की सीढ़िया चढ़ने का मन बना चुके थे, विश्वस्त लोगों ने शिवराज तक संदेशों का आदान प्रदान भी कर दिया था लेकिन तब दिग्गी राजा ने ही समय का इंतजार करो वाला काला धागा बांध दिया था। समय आया तो कैसे लक्षण बनते गए उधर युवराज के सामने राजा-महाराजा झगड़े, भाजपा में भी कैलाश-शिवराज में मालवा-निमाड़ के टिकटों को लेकर गर्मागर्मी हुई और इधर ऐसा रायता फैला कि पिता-पुत्र ने कांग्रेस में दिग्विजय सिंह को मजबूती दे दी और भाजपा में कैलाश ने शिवराज को भी बता दिया कि दिग्विजय सिंह से वाकई उनके रिश्ते कितने मजबूत हैं।

बाप-बेटे भाजपा ज्वाइन करने वाले हों और चौघड़िये में अमृत का वक्त कैलाश बताएं ! जो शिवराज पंद्रह साल से इंदौर को अपने सपनों का शहर बताते रहे हों उन्हे सपने में भी यह संकेत ना मिले कि भाजपा के प्रति प्रेमचंद के मन में इतना प्रेम उमड़ रहा है। दिग्गी के अब कांग्रेस में कितने नंबर बढेंगे देखना है लेकिन भाजपा में विजयवर्गीय ने तो अपने नंबर बढ़ा लिए हैं-इंदौर में भाजपा से जिन भी लोगों के टिकट तय होंगे उन पर ताई और भाई दोनों की सहमति रहेगी क्योंकि दुश्मन का दुश्मन पक्का दोस्त रहता है। याद करिए मंत्री के रूप में कैलाश का वह दर्द भरा अफसाना ठाकुर के हाथ बंधे हुए हैं। याद करिए सार्वजनिक समारोह में सुमित्रा ताई की प्रदेश के मुखिया के प्रति तल्ख टिप्पणी एमवायएच में सैन्य अधिकारी (पुणे) की नियुक्ति सहित अन्य मामलों में दिए सुझावों पर सरकार की बेरूखी।

दो के झगड़े में तीसरे (थावरचंद गेहलोत) का जरूर भला हो गया है। वो कैसे, आइए समझते हैं। यदि गुड्डू अब भी कांग्रेस नहीं छोड़ते तो आलोट से उन्हें चुनाव लड़ना पड़ता, उनके पुत्र अजीत बौरासी को तमाम तिकड़मों के बाद वे पिछली बार यहां से जिता नहीं सके थे।यदि गुड्डू यहां से चुनाव लड़ते तो भाजपा प्रत्याशी जितेंद्र गेहलोत तो जीत नहीं पाते। जीतेंद्र थावरचंद के बेटे हैं। जितेंद्र का नहीं जीतना यानी मोदी-शाह की नजर में थावरचंद के भाव गिरना। अब गुड्डू को उज्जैन की घट्टिया विधानसभा से टिकट दिया जाएगा। इसीलिए भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर का बयान भी जारी हो गया है कि घट्टिया से त्रुटिवश अशोक मालवीय का नाम जारी हो गया है, इसमें संशोधन किया जा रहा है। यहां से गुड्डू का नाम तय होता है तो कांग्रेस से रामलाल मालवीय मैदान में उतारे जा सकते हैं। गुड्डू के नाम को लेकर स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता गेहलोत का विरोध और पुतला दहन भी कर सकते हैं, मुद्दा वही स्थानीय प्रतिनिधि क्यों नहीं।

भाजपा के पास बंगारु लक्ष्मण के बाद दलित चेहरे के रूप में थावरचंद गेहलोत को ही हर बार आगे करने की मजबूरी रहती थी। अब गुड्डू के प्रति प्रेम उमड़ेगा, इसमें कैलाश विजयवर्गीय की भूमिका खास रहेगी। यह भविष्य तय करेगा कि कांग्रेस में देश, काल, परिस्थिति अनुसार अपना लीडर तय करने वाले गुड्डू कितने समय विजयवर्गीय के प्रति प्रेम भाव रखते हैं। पर यह तो तय है कि भाजपा में अब थावरचंद गेहलोत नैपथ्य में जाते नजर आएंगे।बहुत संभव है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में गुड्डू उज्जैन संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ें, वैसे भी शिवराज ने सत्यनारायण कथा आज तक मनोयोग से नहीं सुनी। सिंहस्थ में तो पता ही नहीं चला कि डॉ जटिया यहां रहते भी हैं या नहीं।गुड्डू इस संसदीय क्षेत्र में अब भगवा दुपट्टा डाल कर सक्रिय होंगे तो चिंतामन की चिंता भी बढ़ेगी।मोहन यादव के लिए अच्छा यह है कि कैलाक्श विजयवर्गीय पर निर्भरता कम होगी, और उनके लिए बुरा यह है कि उनके जमीन जायदाद के धंधों, यादवी साम्राज्य की सारी जानकारी गुड्डू के पास सुरक्षित है, लिहाजा उनकी हेकड़ी इस चौखट पर तो नहीं पाएगी ।

जिस तरह विजयवर्गीय सौंपा गया टॉस्क पूरा करने के लिए हर तरीका जायज मानते हैं उसी तरह गुड्डू भी अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए देवी देवताओं को उनकी पसंद का भोग लगाने की पूजन विधि जानते हैं। उनका बीजेपी में जाना जितना थावरचंद के बेटे का भविष्य पीतल को सोने सा चमकाने में सहायक होगा उतना ही सिंधिया कोटे से सांवेर से प्रत्याशी तुलसी सिलावट और उज्जैन उत्तर से कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती तथा सोनकच्छ से कमलनाथ कोटे के प्रत्याशी सज्जन वर्मा जो जीत का सपना देख रहे हैं उन्हें कच्ची नींद से झकझोर कर उठाने जैसा होगा। मालवा निमाड़ की 66 सीटों पर जहां जहां दलित वर्ग का प्रभाव है वहां गुड्डू का पाला बदलना कितना कारगर होता है यह देखना बाकी है।पर यह तय है कि जिस तरह कैलाश विजयवर्गीय ने समय घोषित कर यह धमाका किया है ऐसा ही कुछ कांग्रेस को भी कर के दिखाना होगा। यह क्षेत्र कांग्रेस में दिग्गी राजा के प्रभाव वाला माना जाता है, कांग्रेस उनसे तो कोई अपेक्षा कर नहीं सकती। कमलनाथ के जासूस तोड़फोड़ मचा सकते हैं यह भाजपा को भी पता है।

कांग्रेस की सूची भी कल तक आ जाएगी। आयाराम-गयाराम वाले रास्ते पर भाजपा ने लाल कालीन बिछा कर पिता-पुत्र से कदमताल करा ली है, बस इन्हें यह बौद्धिक देना ही बचा है कि कब राष्ट्र आराधन करना है और कब मुर्दाबाद बोलना है। दोनों दलों ने अपने भोपाल-दिल्ली कार्यालयों में ऑक्सीजन हब स्थापित कर ही दिए हैं । टिकट नहीं मिलने से जिसके मन में भी उच्चाटन भाव पैदा होने से जिस पार्टी में दम घुटने लगेगा, दूसरी पार्टी के सेवादारों की फौज उसकी प्राणरक्षा के भाव से फटाक से मुंह पर ऑक्सीजन मॉस्क लगा देगी, दोनों दलों के होकम रायता ढोलने के काम में लगे हुए हैं ही।

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