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क्या सच में मोदी ने चार साल में विश्व बैंक से एक रुपये का भी कर्ज नहीं लिया?

Posted on: 09 Jun 2018 16:46 by Lokandra sharma
क्या सच में मोदी ने चार साल में विश्व बैंक से एक रुपये का भी कर्ज नहीं लिया?

(रमेश सिंह बिस्ट की पोस्ट से)

नई दिल्ली : विश्व बैंक ने किया बड़ा ख़ुलासा- नरेन्द्र मोदी आजादी के बाद सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। आजादी के बाद पहली बार पीएम मोदी ने विश्व बैंक से सबसे अधिक कर्ज लिया है।

बीजेपी आईटी सेल के द्वारा कहा जा रहा है कि पीएम मोदी ने चार साल में विश्व बैंक से एक रुपये का भी कर्ज नहीं लिया है।सोशल मीडिया पर भले ही चीख-चीखकर लोग कह लें कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, लेकिन हकीकत ये है कि भारत का विकास विदेशी कर्जे के बिना संभव ही नहीं है। सरकार चाहे कोई भी रही हो, प्रधानमंत्री चाहे कोई भी रहा हो, उसे हर साल और हर हाल में विदेश और खास तौर से विश्व बैंक से कर्जा लेना ही पड़ता है। नीचे मोदी सरकार द्वारा लिए गए विदेशी कर्ज की कुछ डिटेल्स दी गयी है।

1- 23 जनवरी 2018 को उत्तराखंड में पानी की सप्लाई के लिए विश्व बैंक ने भारत सरकार को 120 मिलियन डॉलर (करीब 8 अरब रुपये) का कर्ज दिया है।

2- 31 जनवरी 2018 को विश्व बैंक की ओर से तमिलनाडु के गांवों की हालत सुधारने के लिए 100 मिलियन डॉलर (6.5 अरब रुपये) का कर्ज लिया गया है।

3- 24 अप्रैल 2018 को मध्यप्रदेश के गांवों की सड़कों की हालत दुरुस्त करने के लिए 210 मिलियन डॉलर (करीब 14 अरब रुपये) का कर्ज विश्व बैंक ने भारत को दिया है।

4- 8 मई को भारत में चल रहे राष्ट्रीय कुपोषण मिशन के लिए विश्व बैंक ने 200 मिलियन डॉलर (13.5 अरब रुपये) का कर्ज दिया है।

5- 29 मई को विश्व बैंक ने राजस्थान के लिए 21.7 मिलियन डॉलर (1.5 अरब रुपये) का कर्ज दिया है।भारत सरकार ने वाराणसी से हल्दिया तक के इनलैंड वॉटर हाईवे के लिए विश्व बैंक से कर्ज लिया है।

6- इसके अलावा अप्रैल 2018 में ही भारत सरकार ने विश्व बैंक से 125 मिलियन डॉलर ((8 अरब 36 करोड़ रुपये) का कर्ज दवाइयों को बनाने और उनकी गुणवत्ता को सुधारने के लिए लिया है।

अगर पिछले साल की बात करें तो इसका ब्यौरा इस प्रकार है–

1- भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश में टूरिजम को विकसित करने के लिए 40 मिलियन डॉलर ((2 अरब 67 करोड़ रुपये) का कर्ज विश्व बैंक से लिया है।

2– 21 नवंबर 2017 को भारत ने विश्व बैंक से सोलर पार्क प्रोजेक्ट के लिए 100 मिलियन डॉलर (6.5 अरब रुपये) का कर्ज लिया है।

3- 31 अक्टूबर 2017 को विश्व बैंक ने असम में ग्रामीण परिवहन के लिए 200 मिलियन डॉलर (13.5 अरब रुपये) का कर्ज दिया है।

4- 30 जून 2017 को विश्व बैंक ने नेशनल बायोफार्मा मिशन के लिए भारत सरकार को 125 मिलियन डॉलर (8 अरब 36 करोड़ रुपये) का कर्ज दिया है।
ये तो बस दो साल के आंकड़े हैं और चुनिंदा हैं। इनके अलावा और भी बहुत से कर्जे हैं, जिनका अगर जिक्र करने लगा जाए, तो पढ़ते-पढ़ते आप थक जाएंगे, लिखते-लिखते हम थक जाएंगे, लेकिन लोन खत्म नहीं होगा।

सरकार ने असम के गांवों की सड़कों को बनाने के लिए विश्व बैंक से कर्ज लिया है।ऐसा कोई पहली बार नहीं है कि भारत को विश्व बैंक से लोन लेना पड़ रहा है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 1945 से 21 जुलाई 2015 के बीच भारत पर कुल 101 बिलियन डॉलर (676 अरब रुपये) का कर्ज सिर्फ और सिर्फ विश्व बैंक का था। इसके अलावा international bank for reconstruction and development नाम की एक संस्था है, जो विश्व बैंक का ही हिस्सा है।इसने भारत को कुल 52.7 मिलियन डॉलर (3.5 अरब रुपये) का कर्ज दे रखा है। international development association एक और विश्व बैंक की संस्था है, जिसने भारत को पिछले 70 साल में 49.4 बिलियन डॉलर (330 अरब रुपये ) का कर्ज दिया है।

गंगा नदी जिसकी सफाई के लिए भारत अब तक विश्व बैंक से हजारों करोड़ रुपये का लोन ले चुका है। बाकी तो आप समझदार हैं। पता है कि किसने कितना लोन लिया है और किसने कितना काम किया है,जिसके लिए विश्व बैंक इस सरकार को हजारों करोड़ रुपये का लोन दे चुका है।

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