सूर्य सप्तमी : इस व्रत को करने से आप बन जायेंगे करोड़ो के मालिक

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हिंदू धर्म में नव ग्रहों के राजा सूर्य देव की उपासना की परंपरा काफी पुरानी रही है। विश्व का हर एक इंसान उनकी पूजा आराधना करता है। वैसे तो रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित होता है, लेकिन आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है और आज विवस्वत सप्तमी मनाई जा रही है।

मान्यता है कि इस दिन जो भी साधक भगवान सूर्य की पूजा उपासना करता है उसे लंबी आयु, अच्छा आरोग्य, धन-धान्य में बढ़ोत्तरी, यश-कीर्ति, विद्या, भाग्य और पुत्र, मित्र व पत्नी का अक्षय फल प्राप्त होता है। पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने पर भगवान भास्कर अपने भक्तों को सुख-समृद्धि एवं आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। विश्व का एक-एक जीव उनकी कृपा का कृतज्ञ है।

इसी दृष्टि को लेकर करोड़ों-करोड़ जन ‘आदित्यस्थ नमस्कारं येकुर्वन्ति दिने दिने। जन्मांतर सहस्रे दारिद्रयं नोपजायते।’ के अनुसार प्रतिदिन प्रात: सायं भगवान सूर्य नारायण को पुष्प समन्वित जल के अर्घ्य देकर नमन करते हैं। यदि आप ऐसा नहीं करते तो आज के दिन अवश्य करें। इससे आपको सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और वैभव का वरदान मिलेगा।

खासकर विवस्वत सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है। आज के दिन सूर्य की पूजा करने से किसी भी कार्य में आनेवाली बाधा दूर होती है और भाग्य का साथ मिलता है। इससे आयु लंबी होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। बच्चे पढ़ाई-लिखाई में तेज होते हैं और खुशहाल दांपत्य जीवन के साथ-साथ बच्चों का भविष्य भी उज्जवल होता है।

इस विधि से करे सूर्य देव की पूजा
भगवान सूर्य का गायत्री मंत्र यह है : ‘ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात।’ तांबे के बर्तन में जल भरकर उसमें लाल चंदन, चावल और लाल रंग के फूल डालें। आज सारा दिन मन ही मन ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते रहें। लाल आसन पर बैठकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का कम से कम 1 माला जाप करें।

सूर्य पूजा मंत्र-

” एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।”

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