नवरात्रि पर कैंची धाम मंदिर में भक्तों की भीड़ हो रही है| Devotees are getting crowded in the Kainchi Dham temple on Navaratri

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नवरात्रि के अवसर पर नैनीताल के पास स्थित कैची धाम मंदिर भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र बन गया है यहां पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं आइए जानते हैं इस मंदिर की पूरी जानकारी।

नैनीताल से अड़तीस किलोमीअर दूर भवाली रास्ते में कैंची धाम आता है। यह वही जगह है, जहां तकनीकी के दो दिग्गज यानी स्टीव जॉन्स और मार्क जुकरबर्ग शांति की तलाश में पहुंचे थे। आखिर कैसा है बाबा नींव करौरी के चमत्कार से घना यह आश्रम। जिस एपल कंपनी ने पूरी दुनिया में धूम मचा रखी है, उसके फाउंडर स्टीव भी नींव बाबा के दर्शन को पहुंचे थे। स्टीव ने बाबा से आशीर्वाद लिया और बैठे थे कि भूख लग आई। उन्होंने बाबा से भूख लगने की इच्छा जताई। बाबा ने कुछ खाया हुआ सेब उठाकर उन्हें दे दिया। उससे पेट की भूख तो शांत हो गई, साथ ही उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। स्टीव जॉन्स ने उस कटे हुए सेब को एपल कंपनी का लोगो बना दिया। आज भी माना जाता है कि नींव करौरी बाबा के आश्रम में आगंतुक को प्रसन्नता की राह मिलती है, बल्कि उनका यह आश्रम भारतीय संस्कृति से भी दुनिया को रूबरू कराता है।

कहा जाता हैकि मात्र 11 वर्ष की उम्र में बाबा का विवाह एक ब्राह्मण कन्या के साथ हुआ था, लेकिन विवाह के कुछ ही समय पश्चात उन्होंने घर छोड़ दिया और साधु बन गए। फिर 17 वर्ष की अवस्था में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। नैनीताल से अड़तीस किमी दूर भवाली के रास्ते में यह जगह यानी कैंची धाम पड़ता है। बाबा नींव करौरी ने इस स्थान पर 1968 में आश्रम बनाया था। यहां बाबा सन् 1961 में पहली बार आए थे। अपने एक मित्र पूर्णानंद के साथ मिलकर उन्होंने यहां आश्रम बनाने का फैसला लिया। 1973 में बाबा ने अपनी देह त्याग दी, मगर उनकी अस्थियां आज भी यहां सुरक्षित हैं। आज यह आश्रम आस्था का प्रतीक बन गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। श्रद्धा के वशीभूत लोग बाबा नींव करौरी को हनुमानबाबा का धरती पर दूसरा रूप मानते हैं। उनका असली नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था उनका जन्म उत्तरप्रदेश के अकबरपुर गांव में 1900 में हुआ था। भव्य मंदिर का रूप ले चुके कैंची धाम में मां दुर्गा, वैष्णो देवी, हनुमानजी और राधाकृष्ण की मूर्तियां हैं। बाबा का कमरा और मूर्तियां उसी तरह सुरक्षित हैं, जैसे बाबा के समय थीं। उनकी निजी वस्तुएं जैसे गद्दी, कंबल, छड़ी आज भी वैसे ही उस कमरे में मौजूद हैं, जिसमें बाबा सोया या बैठा करते थे।

जब लूलिया ने हिंदू धर्म अपनाया – 

बाबा अलौकिक शक्तियों के स्वामी माने जाते हैं। आडंबरों से दूर बाबा के माथे पर न त्रिपुण्ड लगा होता था, न गले में जनेऊ,न कंठमाला। देह पर साधुओं वाले वस्त्र भी कभी धारण नहीं किए। आश्रम आने वाले भक्त जब उनके पैर छूने लगते थे, तो कहते थे पैर मंदिर में बैठे हनुमान बाबा के छुओ। सहज और सरल स्वभाव के धनी बाबा ने कभी किसी को आकर्षित करने की कोशिश नहीं की। उनके विदेशी भक्त व जाने-माने लेखक रिचर्ड एलपर्ट ने मिरेकल ऑफ लव नाम से पुस्तक लिखी, जिसमें बाबा के चमत्कारों का विस्तार से वर्णन है। हॉलीवुड एक्टर जूलिया रावटर््र्स को अचानक एक बार बाबा की तस्वीर के कहीं दर्शन हो गए। देखते ही पता उनमें क्या हुआ कि वह बाबा की मुरीद हो गईं और उनके बारे में जानने की जिज्ञासा लेकर भारत आ गईं। फिर उन्होंने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया।\

कैसे पहुंचे कैंची धाम ?

आप अगर बाबा के आश्रम धार्म दर्शन के लिए आना चाहते हैं, तो दिल्ली से काठगोदाम के लिए सीधी ट्रेन है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर उतरकर वहां से टैक्सी ले सकते हैं। अगर रोडवेज की बस से जाना चाहते हैं, तो पहले हल्द्वानी पहुंचे, फिर वहां से वाया भवाली होते हुए अल्मोड़ा वाली रोडवेज बस में बैठें या फिर सीधे टैक्सी सेवा ले लें। हल्द्वानी और काठगोदाम एक ही शहर के दो हिस्से हैं, लेकिन हल्द्वानी बस स्टैण्ड पहले और काठगोदाम बाद में पड़ेगा।

पर्यटकों के लिए अद्भुत स्थल – 

बाबा नींव करौरी महाराज ने एक धाम नैनीताल जिले के कैंसी में बनाया तो दूसरा हिमाचल में। शिमला की सुंदर वादियों में तारा देवी पहाड़ी पर कुटिया बनाकर बाबा १०-१२ दिन ही रुके थे। जब योग-ध्यान करते हुए उनके मन में कुटिया की जगह हनुमान मंदिर बनाने की इच्छा जागृत हुई और यह बात उन्होंने अनुयायियों को बताई। १९६२ में हिमाचल के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर राजा बजरंग बहादुर सिंह (भद्री रियासत के राजा) ने यहां मंदिर का निर्माण शुरू करा दिया। २१ जून १९६६ के दिन मंगलवार को इसका शुभारंभ हुआ। इसको इतना अद्भुत बनाया गया है कि शिमला आने वाले पर्यटक यहां गए बिना नहीं रहते।

जुकरबर्ग एक नहीं, दो दिन रुके – 

कैंची धाम के बुजुर्ग सेक्रेटरी विनोद जोशी बताते हैं कि कुछ साल पहले अमेरिका से लेरी विलियंट का फोन आया था कि मार्क एक दिन की यात्रा पर बाबा के दर्शन को आना चाहते हैं।जुकरबर्ग पंतनगर आए और वहां से यहां पहुंचे थे। यहां आकर बोले, मन है कि और रुकूं पर..! इतना कहते हुए वे बाबा के कक्ष में मात्था टेक ही रहे थे कि कुछ देर बाद मौसम बदलने लगा और बारिश शुरू हो गई। वह भी इतनी तेज कि आवागमन बाधित हो गया और उन्हें दो दिन आश्रम में ही बिताने पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान जुकरबर्ग ने उनसे कहा भी था कि एक महीने पूर्व भारत की यात्रा पर गए थे, उस समय उत्तराखंड में कैंची धाम पहुंचने की इच्छा हुई और वहां एक दिन की जगह दो दिन बिताकर लौटा तो अच्छे दिन आ गए। मार्क ने कैंची बाबा की यात्रा स्टीव जॉन्स की सलाह पर की थी।

प्रेरणा –
प्रमोद कुमार गुप्ता
आयकर एवं कर सलाहकार

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