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देशांतर | ‘Deshaantar’ Pablo Neruda Poem

Posted on: 22 Apr 2019 13:49 by Mohit Devkar
देशांतर | ‘Deshaantar’ Pablo Neruda Poem

मित्रो आज प्रस्तुत है स्पानी भाषा के विश्व-ख्यात महाकवि पाब्लो नेरूदा की एक छोटी किन्तु अपने प्रभाव में बेहद गहन और व्यापक कविता, जो कुछ उदाहरणों के मार्फ़त जीवन में कविता की भूमिका का सहज बखान करती है :

सादगी

ख़ामोशी है ताकत
मुझे बताते हैं पेड़
और गहराई
बताती हैं जड़ें
और शुद्धता
बताता है आटा

किसी पेड़ ने नही कहा
मैं सबसे ऊँचा हूँ
किसी जड़ ने नहीं कहा
मैं पाताल से आती हूँ
और कभी नहीं कहा किसी रोटी ने
कुछ भी नहीं है रोटी जैसा !

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