पिछले कई महीनों से मानसून के दौरान साफ रही दिल्ली की हवा अब बिगड़ती जा रही है। राजधानी समेत पुरे एनसीआर में धुंध की चादर छाई हुई है। धुंध की यह चादर मौसम बदलने की वजह से नहीं है। यह उस खतरे की निशानी है जिसकी आशंका पिछले कुछ दिनों से जताई जा रही है। पिछले कई दिनों से दिल्ली में प्रदूषण खराब स्तर पर बना हुआ है।

दिवाली से पहले शुक्रवार को दिल्ली की हवा की गुणवता एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर गिरकर 262 पहुंच गई थी। हवा की गुणवत्ता आने वाले दिनों में और खराब होने की आशंका है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने अनुमान लगाया है कि शनिवार को ही दिल्ली में AQI 300 से पार पहुंच सकता है। दिल्ली के कई इलाकों में सुबह स्मॉग की चादर नजर आई।

फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां बढ़ने की आशंका

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के बढ़ते लेवल को देखते हुए ग्रैप के दूसरे फेज को लागू कर दिया गया है। निर्माण कार्य के अलावा कई दूसरी गतिविधियों को लेकर पाबंदियां लग गई है। दिल्ली में ठंड के महीनों में अक्सर प्रदूषण की दिक्कत बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से कैंसर हो सकता है। हवा में मौजूद छोटे प्रदूषक तत्व सांस के साथ अंदर जाते हैं और फेफड़ों में अटक जाते हैं। इससे फेफड़ों की सेल्स को नुकसान पहुंचता है, जिससे इनमें सूजन आ जाती है।

आतिशवाजी पर प्रतिबन्ध

हालांकि इसके पीछे पराली, हवा की गति कम होना, गाड़ियों के धुएं और दिवाली की आतिशबाजी को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इस बार दिवाली से पहले ही प्रदूषण का लेवल बढ़ गया है। पटाखे जलाने पर रोक है और यह पिछले साल भी थी बावजूद इसके पटाखे जले इस बार यदि ऐसी स्थिति आई तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि सरकार की ओर से भी इसको लेकर सख्ती के संकेत दिए गए हैं।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, शुक्रवार को दिल्ली की हवा 262 एक्यूआई के साथ खराब श्रेणी में दर्ज की गई। केंद्र की वायु मानक संस्था सफर इंडिया के मुताबिक, बीते 24 घंटे में 2.5 से बड़े कणों की पीएम 10 में 47 फीसदी हिस्सेदारी रही है। पीएम 10 का स्तर 228 व पीएम 2.5 का स्तर 109 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज किया गया है।