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यहां करोड़ों से ज्यादा के आभूषणों और नगदी से होता है महालक्ष्मीजी का श्रृंगार

Posted on: 06 Nov 2018 11:01 by shilpa
यहां करोड़ों से ज्यादा के आभूषणों और नगदी से होता है महालक्ष्मीजी का श्रृंगार

एक अद्भुत मंदिर जहा दीवाली पर करोड़ों रुपयों और आभूषण से सजता है माता का दरबार। विशाल महालक्ष्मी के इस मंदिर को दीवाली के समय खूब सजाया जाता है। इस मंदिर के कपाट धनतेरस के शुभ दिन, साल में केवल एक ही बार खुलते है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में इस मंदिर के कपाटों को खोल दिया जाता है। इसके पश्चात दिवाली के बाद तक ये कपाट खुले रहते हैं। दीपावली के पांच दिन तक सभी पर्व धूमधाम से मनाये जाते है।

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में एक ऐसा मंदिर है जहां लोगों को प्रसाद में आभूषण बांटे जाते है। जी हां ये आपको मजाक लग सकता है लेकिन ये सच है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भेंट के रुप में चढ़ाया जाता है वो साल के अंत में दोगुनी हो जाती है। इसलिए दीवाली से पहले लोग यहां पर पूरी श्रद्धा के साथ अपने आभूषण और नोटों की गड्डियां लेकर आते हैं। इन नोटों की गड्डियां और आभूषण को मंदिर में ही रख लिया जाता है। बकायदा इन सबकी एंट्री भी की जाती है और टोकन भी दे दिया जाता है। भाई दूज के बाद टोकन वापस देने पर आपको आपकी अमानत वापिस मिलती है।

इस मंदिर की खासियत ये है कि आज तक भक्तों के द्वारा लाए गए लाखों के आभूषण इधर से उधर नहीं हुए हैं। एक समय के बाद भक्तों को ये वापस कर दिए जाते हैं।

सुत्रों से बताया है कि इस मंदिर में पिछले वर्ष लगे आभूषणों की कीमत 100 करोड़ रुपए थी । सजावट में लगा इतना सारा धन मंदिर को दान में नहीं बल्कि सजावट के लिए श्रद्धालु देते हैं, जो उन्हें बाद में वापस कर दिया जाता है। जो भक्त यहाँ दर्शनार्थ आते है उन्हें प्रसाद के रुप में नगदी तथा आभूषण दिए जाते हैं। भक्त इस प्रसाद को शगुन मानकर कभी भी खर्च नहीं करते हैं बल्कि संभालकर रखते हैं।

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मान्यता है कि इस मंदिर में महालक्ष्मी के श्रंगार के लिए जो भी अपने आभूषणों को लाता है उसके घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।

इस मंदिर में महिलाओं के प्रसाद के रुप में श्रीयंत्र, सिक्का, कौड़ियां, अक्षत, कंकूयुक्त कुबेर पोटली दी जाती है, जिन्हें घर में रखना शुभ माना जाता है।

 

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