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दे दे प्यार दे – फिल्म समीक्षक इदरीस खत्री द्वारा | ‘De De Pyaar De’ – Film Reviewer Idris Khatri

Posted on: 17 May 2019 19:01 by bharat prajapat
दे दे प्यार दे – फिल्म समीक्षक इदरीस खत्री द्वारा | ‘De De Pyaar De’ – Film Reviewer Idris Khatri

निर्देशक – अकीव अली
अदाकार – अजय देवगन, रकुल प्रीत सिंह, तब्बू, आलोक नाथ, जावेद जाफरी, जिमि शेरगिल
लेखन – लव रंजन, तरुण जैन
संगीत – अमाल मलिक, रोचक कोहली, हितेश सोनिक
समय – 135 मिनट

कहानी –
एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति आशीष मेहरा उम्र 50 साल(अजय देवगन) उसकी मुलाकात आएशा खुराना (रकुल प्रीत) उम्र 26 साल से होती है और मुलाकात मुहब्बत में तब्दील हो जाती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब आशीष मेहरा अपनी प्रेमिका को घर लेकर पहुचते है तो वहाँ उसकी बीवी मंजू (तब्बू) और बच्चे होते है, जो आएशा की उम्र के ही होते है लगभग, अब हमारा हीरो दो औरतों में फंस जाता है एक बीवी दूसरी प्रेमिका।

यह परिस्थिति जन्य (सिचुएशनल कॉमेडी) हास्य बनता है जो कि उम्दा है उस पर संवाद भी कमाल तो हास्य तो भरपूर आना ही है। इस कड़ी में चार चांद लगाए है जावेद जाफरी और जिमि शेरगिल ने अब हीरो किसे मिलेगा और कैसे ? इस सवाल के जवाब के लिए फिल्म देखना बनती है।

फिल्म ने बड़ी सादगी से दो सामाजिक मुद्दों पर ध्यान खींचा पहला तलाक, दूसरा लिव इन रिलेशनशिप, साथ ही फिल्म मानवीय रिश्तों का ताना बाना भी बुनती है।

अदाकारी पर बात करे तो अजय देवगन वह सोना है जिसे आप चाहे जहा धारण कीजिये वह अपनी चमक दिखाएगा ही तो दोस्तो अजय वह कलाकार है जो हर किरदार को पूरी तैयारी से पेश करते है यहां भी वही किया। उन्होंने, बोल बच्चन में पहलवान, दृश्यम में जवान बेटी के पिता, सिंघम में अकडू पुलिसवाला, गोलमाल में गोपाल सभी किरदार दिल को छू जाते है।

तब्बू फिल्म जगत में एक हीरे की तरह है जो कि परिपूर्णता से भरी हुई है, राष्ट्रीय सम्मान से नवाजी अदाकारा है। रकुल प्रीत दक्षिण की कामयाब हीरोइन में शुमार होती है साथ ही अजय, तब्बू के बीच मे कहि भी वह हल्की नही पड़ती है, उन्होंने किरदार जिंदादिल होकर किया है। जिमि शेरगिल, जावेद जाफरी, आलोक नाथ छोटे किरदारों में सम्पूर्ण देते है।

फिल्म का पहला हाफ कसा हुआ है लेकिन दूसरे हाफ को सम्पादित किया जा सकता था, दूसरे हाफ में फिल्म पकड़ छोड़ती लगी लेकिन तब्बू, आलोक नाथ, जिमि शेरगिल ने बहुत हद तक सम्भाल लिया।

संगीत –
एक गाना दिल रोये जाए, अरिजीत का गया हुवा मधुर बन गया है। आप उसे याद रख पाएंगे। शेष गाने याद नही रहते, पार्श्व ध्वनि पर बात करते है, कही कही पर हितेश शोनीक ने बढ़िया काम किया है खास तब्बू और रकुल के शीत युद्ध वाले दृश्य में।

बजट – 75 करोड़
60 करोड़ निर्माण लागत, 15 करोड़ विज्ञापन एवं वितरण
फिल्म को भारत में 3400 स्क्रीन्स पर प्रदर्शित किया गया है। फिल्म को हिट होने के लिए 95 करोड़ की कमाई चाहिए वही सुपरहिट के लिए 130 करोड़ की कमाई चाहिए। फिल्म के पेड प्रीविव्यू शो रखे गए थे उससे कलेक्शन पहले दिन की हुआ है 4 करोड़ का, एडवांस बुकिंग 13 करोड़ 80 लाख की हुई है।

कुछ अलग हट के –
फिल्म का विषय हट के है दोहरी उम्र का नायक आधी उम्र की नायिका उनमें प्रेम, हॉलीवुड कोरिया में इन विषयों पर बहुत फिल्मे आई परन्तु भारत मे पहला प्रयोग है।

मजबूत कड़ी –
कहानी बढ़िया है संवाद भी हास्य से भरपूर है।
कमजोर कड़ी –
दूसरे हाफ में आप फिल्म देखते देखते समझने लगते है आगे क्या होगा, दूसरा हाफ सम्पादित किया जा सकता था, 12 से 15 मिंट काटछाट की जा सकती थी। अंत मे फिल्म मनोरंजन, हास्य से भरपूर पैसा वसूल है, देखी जा सकती है।
फिल्म को 3.5 स्टार्स


फिल्म समीक्षक
इदरीस खत्री

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