भीमा कोरेगांव केस: पुलिस की प्रेस कांफ्रेंस से बॉम्बे हाईकोर्ट नाराज, उठाए सवाल

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Court Questioned The Media Briefing Given By Police In Bhima Koregaon Workers Arrest.

भीमा कोरेगांव मामले में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की गई प्रेस कांफ्रेंस पर अदालत ने सवाल उठाए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जब ये मामला अदालत में विचाराधीन है तब पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस कैसे कर सकती है। अदालत ने इस मामले पर हैरानी जताई है.

महाराष्ट्र पुलिस का हैरान कर देने वाला खुलासा, आतंकवादियों के साथ भी था माओवादी विचारकों का संपर्क

न्यायमूर्ति भाटकर ने कहा, ‘पुलिस ऐसा कैसे कर सकती है? मामला विचाराधीन है। उच्चतम न्यायालय मामले पर विचार कर रहा है। ऐसे में मामले से संबंधित सूचनाओं का खुलासा करना गलत है।’ लोक अभियोजक दीपक ठाकरे ने कहा कि वह संबंधित पुलिस अधिकारियों से बात करेंगे और उनसे जवाब मांगेंगे।

बता दे कि पीठ भीमा कोरेगांव हिंसा का शिकार होने का दावा करने वाले शख्स सतीश गायकवाड़ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में उन्होंने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से करवाने की मांग की है। गायकवाड़ ने उच्च न्यायालय से पुणे पुलिस से मामले की आगे की जांच नहीं करवाने और जांच पर रोक लगाने की अपील की है। पीठ ने मामले में अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय की है।

भीमा कोरेगांव मामले में सरकार को खानी पड़ी मुंह की

गौरतलब है कि महाराष्ट्र पुलिस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि गिरफ्तार किये माओवादी समर्थकों के खिलाफ ठोस सबूत हैं, जिससे यह साबित होता है कि इनका अलगाववादीयों से सबंध था, इन्ही सबूतों के आधार पर गिरफ़्तारी की गयी थी। सिर्फ इतना ही नहीं पुलिस का यह भी दावा है कि उन्हें मिले सबूतों से इस बात का भी पता चलता है कि पांचो वामपंथी कार्यकर्ताओं के कश्मीरी अलगाववादियों से संबंध थे।

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