आईआईएम इंदौर और जीआईएएन द्वारा अनुसंधान पर पाठ्यक्रम की शुरुआत | Course on Research by IIM Indore and GIAN

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आईआईएम इंदौर ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क्स (जीआईएएन) और मानव संसाधन और विकास मंत्रालय के सहयोग से 15-24 अप्रैल, 2019 से ‘मिश्रित पद्धति अनुसंधान के आधार’ पर एक पाठ्यक्रम आयोजित कर रहा है। पाठ्यक्रम का उद्घाटन सोमवार 15 अप्रैल को प्रोफेसर हिमांशु राय, निदेशक, आईआईएम इंदौर और प्रोफेसर प्रबीन पाणिग्रही, पाठ्यक्रम समन्वयक और संकाय सदस्य आईआईएम इंदौर की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर कर्नल गुरुराज गोपीनाथ पामिडी (सेवानिवृत्त), सीएओ, आईआईएम इंदौर भी उपस्थित थे। पाठ्यक्रम के प्रशिक्षक डॉ. लक्ष्मी एस. अय्यर, वाकर कॉलेज ऑफ बिजनेस, एपलाचियन स्टेट यूनिवर्सिटी की सूचना प्रणाली की प्रोफेसर और प्रोफेसर प्रबीन पाणिग्रही, आईआईएम इंदौर के सूचना क्षेत्र में प्रोफेसर रहेंगे।

उद्घाटन की शुरुआत प्रोफेसर पाणिग्रही ने की। उन्होंने कार्यक्रम के लिए पंजीकृत सभी 74 प्रतिभागियों का स्वागत किया और उन्हें पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी दी।

इसके बाद प्रोफेसर राय का संबोधन हुआ। उन्होंने अपनी बात शुरू करते हुए कहा, कि हर चीज से या हर इंसान से सीखने के लिए हमेशा कुछ न कुछ होता है। हम हमेशा अपने आस-पास किसी ना किसी चीज में अर्थ ढूंढ सकते हैं। हमें हमेशा यह जानने के लिए उत्सुक रहना चाहिए कि आसपास क्या है और उससे क्या सीख मिलती है या क्या नया जानने को मिलता है।

फिर उन्होंने प्रतिभागियों को ‘विकास की कुंजी’ के रूप में तीन महत्वपूर्ण बिंदु बताये। पहला- अपने आप को जानें। ‘न कि सतही पहचान, न कि नाम या अपने पदनाम को जानो, बल्कि अपने भीतर के आत्म को जानो। एक सतही पहचान किसी चीज़ या किसी और से ली जाती है। लेकिन हमेशा एक गहरी पहचान होती है- जो आपकी वर्तमान पहचान है और अधिक प्रासंगिक है ‘, उन्होंने कहा। उन्होंने प्रतिभागियों को अगले दस दिनों में इस पाठ्यक्रम से न केवल सीखने के लिए प्रोत्साहित किया, बल्कि स्वयं को बेहतर भी बेहतर जान सकें, ऐसी उम्मीद जताई।

उन्होंने दूसरा बिंदु बताया कि अपने प्रतिभागियों को जानना भी बेहद ज़रूरी है। यह जानना ज़रूरी है की आपके प्रतिभागी को किस चीज़ की, किस ज्ञान की ज्यादा आवश्य्कता है , न कि आप उसको कौनसा ज्ञान देना पसंद करते हैं या आपके पास क्या है। ‘अन्यथा, आप अच्छे से अपने हिसाब से उसे कुछ पढ़ा कर उपलब्धि की भावना तो पा सकते हैं, किन्तु संतुष्ट नहीं हो सकते। क्योंकि आप उसे वह तो दे ही नहीं सके, जिसकी उसे ज़रूरत थी ‘, उन्होंने कहा।

उन्होंने बताया की अपने विषय को भी गहराई से समझना बेहद ज़रूरी होता है। ‘जितना आप सीखते हैं, उतना ही आपको पता चलता है कि आप कितने अज्ञानी हैं। मुझे आशा है कि यह पाठ्यक्रम आपको कई अन्य शोध विधियों को जानने में मदद करता है जो विभिन्न क्षेत्रों से हैं, और जो आप नहीं जानते हैं, उसके बारे में अधिक जानने में आपकी सहायता करेंगे’, उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी को महान नहीं बनाती है, लेकिन शिक्षा विनम्र बनाती है। उन्होंने प्रतिभागियों को न केवल पाठ्यक्रम से जितना संभव हो उतना अवशोषित करने के लिए प्रोत्साहित किया, बल्कि उन्हें अन्य प्रतिभागियों और संकाय सदस्यों के साथ नेटवर्किंग करके ज्यादा से ज्यादा ज्ञान अर्जन करने के लिए कहा।

उद्घाटन सत्र एक चाय ब्रेक के साथ संपन्न हुआ जिसने प्रतिभागियों को एक दूसरे को जानने के लिए एक मंच प्रदान किया।

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