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देश का पहला ऐसा आयोजन जहां एक मंच पर 20 राज्यों के 450 कलाकार

Posted on: 08 May 2018 03:41 by Ravindra Singh Rana
देश का पहला ऐसा आयोजन जहां एक मंच पर 20 राज्यों के 450 कलाकार

इंदौर, (हेमा लोवंशी): 18 साल पहले जब मालवा उत्सव की शुरुआत की थी तब नहीं पता था कि यही मालवा उत्सव शहर ही नहीं ,प्रदेश ही नहीं , देश का प्रसिद्ध उत्सव बन जाएगा। साल-दर-साल मालवा उत्सव का विस्तार होता गया और आज इसी उत्सव ने बहुत बड़ा स्वरूप ले लिया।

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यह बात कही मालवा उत्सव की शुरुआत करने वाले आईडीए अध्यक्ष, लोक संस्कृति मंच के संयोजक शंकर लालवानी जी ने। लोक संस्कृति को सहेजने, संवारने के उद्देश्य 18 साल पहले मालवा उत्सव कि छोटे स्तर पर शुरुआत की। पर आज यही उत्सव देश के हर कोने में अपनी रंगत बिखेर रहा है। घमासान डॉट कॉम से विशेष बातचीत में शंकर लालवानी जी ने मालवा उत्सव के लंबे सफर की कई बातें शेयर की।

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हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान
हमारे देश की लोक कला बेहद समृद्ध और वैभवशाली है। देश के हर कोने में अलग -अलग लोक कला देखने को मिलती है, जो देश को कई रंगों में रंग देती है। लेकिन कुछ ही सालों में पाश्चात संस्कृति इतनी हावी हो गई , कि हम लोग अपनी ही लोककला को भुलाने लगे । लोककला को संवारने , सहेजने और प्रसिद्ध करने के उद्देश्य से मालवा उत्सव की शुरुआत की गई । यदि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को संभाल कर रखें और उसे आगे बढ़ाएं तो पाश्चात्य संस्कृति कभी हावी नहीं हो सकती । हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है और अपनी पहचान को धूमिल नहीं होने देना चाहिए।

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अब लोग हमें अप्रोच करते हैं
शुरुआती दौर में मालवा उत्सव के लिए लोक कलाकारों को उत्सव में आमंत्रित करने के लिए हम ढूंढते थे। अब हाल यह है कि विभिन्न प्रदेशों के कलाकार प्रस्तुतियां देने के लिए हमें अप्रोच करते हैं। पहले कुछ राज्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान ही उत्सव से जुड़े थे। अब कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लोक कलाकार हमसे जुड़ चुके हैं ।खुशी तो होती ही है, यदि हम कोई काम करें और वह इतना सफल हो जाए तो उसकी खुशी ही अलग है । हमारी कोशिश रहती है कि हम साल-दर-साल कुछ ना कुछ नया दर्शकों को दें। लोग कलाकारों को भी मंच प्रदान करें।

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बन चुका है वर्ल्ड रिकॉर्ड
मालवा उत्सव हर साल अलग-अलग जनकल्याण की थीम पर आयोजित होता है। सन 2016 में मालवा उत्सव मैं गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बन चुका है। इस रिकॉर्ड के लिए 20 राज्यों के 450 से अधिक लोक कलाकारों ने एक ही समय पर एक मंच पर लोक नृत्य की प्रस्तुति दी थी। लोक नृत्य की प्रस्तुति के लिए कलाकारों ने 4 दिन तक दिन-रात कड़ी मेहनत की थी। देश का यह पहला ऐसा आयोजन था जहां एक मंच पर अलग-अलग संस्कृतियों के कलाकारों ने परफॉर्म किया था।

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तीनों सेनाओं के अधिकारी मालवा उत्सव में
2017 की थीम नमामि देवी नर्मदे थीम के साथ ही स्वच्छता का संदेश भी दिया था। इस थीम को लोगों ने काफी पसंद भी किया था। इसी उत्सव में इंटरनेशनल ग्रुप भी शामिल हुए थे। मालवा उत्सव में परफॉर्म करने के लिए इन्होंने खुद हमें अप्रोच किया था।

2018 का मालवा उत्सव की थीम बहन बेटी बहू है। इस वर्ष का मालवा उत्सव भी बेहद खास रहा क्योंकि 12 देशों के तीनों सेनाओं के आर्मी ऑफिसर्स शामिल हुए। ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान ,मंगोलिया, बांग्लादेश ,श्रीलंका ,बोट्सवाना, नेपाल ,भूटान, फिजी, साउथ अफ्रीका के अधिकारियों ने सांस्कृतिक उत्सव की जानकारी ली। लोक कलाकारों के साथ फोटो भी खिंचवाए। अधिकारियों ने कहा कि हमने भारत के बारे में जैसा सुना था , वैसा ही पाया। एक ही मंच पर इतनी सारी लोक कलाओं को देखने का मौका हमें मिला।

कम नहीं है चुनौतियां

आयोजन जितना बड़ा होता है उतनी ही बड़ी उसकी तैयारियां होती हैं। मालवा उत्सव की तैयारी भी हम 6 महीने पहले से करते हैं। स्टेज से लेकर एंट्री गेट तक हर छोटी से छोटी बातों को ध्यान में रखा जाता है ,ताकि कलाकारों को और दर्शकों को कोई परेशानी ना हो। मालवा उत्सव देश का प्रतिष्ठित उत्सव बन गया है। इसलिए हमारे लिए भी चुनौतियां कम नहीं हैं। पर कहते हैं ना अच्छे काम के लिए निकलो तो सहयोग मिल ही जाता है , बस यही हमारे साथ होता है।

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