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गर्मी के कूल उपाय,आलोक पुराणिक की कलम से ……

Posted on: 10 Jun 2018 11:32 by krishnpal rathore
गर्मी के कूल उपाय,आलोक पुराणिक की कलम से ……

गर्मी 44 से 45 से 47 डिग्री की ओर है, तब एक उपाय तो यह है कि दिल्ली के इंडिया गेट के तालाब में छलांग मार दें, खुद को भैंस समझते हुए। भैंस-मुद्रा में बंदे के गर्मी नहीं लगती। भैंस-मुद्रा में बंदा सभी चिंताओं से मुक्त हो सकता है, महंगाई से लेकर टैक्स से लेकर, सिर्फ चारे की चिंता रहती है। उस चिंता से कोई भी भैंस भारत-भूमि में कभी मुक्त ना हो सकती, क्योंकि नेताओं से मुक्ति असंभव है।

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गर्मी के दिनों में बड़े बुद्धिजीवी, आर्टिस्ट वगैरह ठंडे देशों में परफार्म करते हुए पाये जाते हैं। जैसे स्विटजरलैंड की नाली व्यवस्था के अध्ययन के लिए कोई बड़ा बुद्धिजीवी स्विटजरलैंड गया हो सकता है या कोई टाप नर्तकी ला-कूल पेरिस में परफार्म कर रही हो सकती है। बुद्धिजीवी भी नर्तकियों जैसे हो लिये हैं, मौका-मुकाम-डिमांड के हिसाब परफार्म करते हैं। यानी अगर विदेश जाने जितने बड़े ना हुए हैं, तो हैसियत बढ़ाइये, गर्मी को न कोसिये। आप छोटे आदमी हैं, छोटे आदमी को गर्मी ही नहीं, सर्दी भी सता सकती है। बल्कि हर मौसम सता सकता है। मौसम ना सता पाये, तो लोकल पुलिसवाला यह जिम्मा पूरा कर सकता है। हैसियत बढ़ाइये, मौसम या पुलिसवाले को ना कोसिये। छोटा आदमी हमेशा गर्मी-सर्दी से परेशान रहता है, बड़ा आदमी ही सीबीआई वगैरह से परेशान हो पाता।

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टीवी देखना बंद कर दें, टीवी एंकरों की ड्रेस टीवी चैनलों की खबरों की तरह फर्जी हो जाती है गर्मी में। फुल सर्दियों की ड्रेस-टाई, सूट में एंकर चीख रहा होता है-गर्मी का कहर। गर्मी कहर तो पब्लिक को दे रही है, भाई तुझे तो टीआरपी दे रही है। एकैदम कतई फर्जी लगता है एंकर, उस नेता के माफिक जो एयरकंडीशंड हैलीकाप्टर से निकलकर कहता है-देश संकट में है। संकट देश पर है, तू देश कहां, तू तो देश से ऊपर है। तू तो एयरकंडीशंड मजे में है।

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इंडिया गेट-आईटीओ या किसी भी बड़े चौराहे पर आइसक्रीम-कुल्फी का ठेला लगाइये-कुल्फी का नाम रखिये-निर्मोल कुल्फी, किरपा आना शुरु हो जायेगी। बिक गयी, तो कमाई की ठंडक आयेगी, ना बिकी, तो भी अनबिकी कुल्फी ठंडक देगी।कुल्फी कायदे से बेच पाये, तो एक दिन किरपा बेचने का भी चकाचक कारोबार कर पायेंगे।

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