लगातार 11 बार चुनाव जीतने वाला यह कांग्रेस नेता मोदी लहर में हुआ ढेर | Congressman Consecutive Wining 11 Elections, defeated first time in Modi Wave

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लोकसभा चुनाव में जीत के बाद देशभर में बीजेपी का डंका बज रहा है। मोदी लहर में विपक्षी पार्टियों के कई दिगगजों के हौसलें पस्त हो गए हैं। इस चुनाव में कई ऐसे दिग्गजो ने भी हार का स्वाद चखा है जिनकी जीत के लिए उनकी पार्टी पूरी तरह से आश्वस्त रही है। इसी सूची में कांग्रेस के दिग्गज मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम भी शामिल है।

बता दे कि मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत को लेकर कांग्रेस हमेशा से ही निश्चिंत रही है। खड़गे कांग्रेस में एक ऐसा नाम है जिन्होने जहां से चुनाव लड़ा है वहां पर जीत दर्ज की है। लेकिन 2019 में चली मोदी सुनामी में नहीं टिक सके और उन्हे हार का मुंह देखना पड़ा। ऐसा पहली बार हुआ है जब खड़गे को चुनाव मेें शिकस्त मिली है।

खड़गे अपने राजनीतिक करियर में 9 बार विधायक और दो बार सांसद रहे हैं। लेकिन इस चुनाव में उन्हे बीजेपी उम्मीद्वार उमेश जाधव ने 95,452 वोटों से मात दी है।

मोदी लहर में दर्ज की जीत
गौरतलब है कि खड़गे ने 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बीच गुलबर्गा संसदीय सीट से जीत हासि की थी और कांग्रेस संसदीय दल के नेता बने थे। खड़गे यूपीए सरकार के दौरान रेल मंत्री, श्रम और रोजगार मंत्री के पद रह चुके हैं। साथ ही वह वे गुलबर्गा से दो बार सांसद भी रहे हैं। इसके अलावा वह लोकसभा में कांग्रेस के संसदीय दल के नेता भी रहे हैं। खड़गे स्वच्छ छवि वाले नेता माने जाते हैं।

दलित नेता की छवि

कर्नाटक में खड़गे दलित नेता के रूप में जाने जाते हैं। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भी वे सीएम पद की दौड़ में शामिल थे लेकिन कांग्रेस ने राज्य के बजाए राष्ट्रीय जिम्मेदरी सौंपी।

कांग्रेस में ऐसा रहा सफर
खड़गे 1969 में कांग्रेस से जुड़े थे जिसके बाद वह कांग्रेस शहर अध्यक्ष बने। इसके बाद उन्होने 1972 में पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा और 2008 तक लगातार 9 बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और अजेय रहे। जिसके बाद उन्होने 2009 में गुलबर्गा संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और संसद पंहुचे।

कर्नाटक में कांग्रेस का सफाया
कर्नाटक में बीजेपी को शानदार जीत मिली है। यहां पर बीजेपी एतिहासिक जीत दर्ज कर कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन का सूपड़ा साफ कर दिया है। बीजेपी ने राज्य की कुल 28 संसदीय सीटों में से 25 पर जीत हासिल की है। वहीं बीजेपी की इस जीत के बाद राज्य की एच डी कुमारस्वामी सरकार पर खतरा मंडराता हुआ भी नजर आ रहा है।

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