क्या इसलिए कांग्रेस के गुड्डू हुए भाजपाई

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मुकेश तिवारी
( [email protected])

मध्यप्रदेश और ख़ासकर मालवा के बड़े कांग्रेस नेता प्रेमचंद गुड्डू विधानसभा चुनाव की टिकट की बेला में अचानक भाजपाई हो गए। उनके इस दलबदल और ह्रदय परिवर्तन के पीछे कौन है यह सवाल राजनीतिक हलको में गूंजने लगा है। गुड्डू ने ऐसा अपने मन से किया या उनसे ऐसा करवा दिया गया, यह सवाल भी पूछा जाने लगा है। इसका ठीक- ठाक जवाब हो सकता है आने वाले कुछ दिनों में सामने भी आ जाए।

उज्जैन से पूर्व सांसद रहे गुड्डू का भाजपा में शामिल होने जितना महत्वपूर्ण है,  उससे कही ज्यादा महत्वपूर्ण है कांग्रेस को इस वक्त गुडबाय बोल देना। इसके पीछे खुद कांग्रेसी दो दिन पहले कांग्रेस के दो बड़े नेताओं की दिल्ली में  हुई कथित तकरार को भी कारण के रूप में ना केवल पढ़ रहे हैं बल्कि हाथोंहाथ बताने में भी जुटे हैं। यानी, उनके कहने का मतलब यह है कि गुड्डू खुद चलकर भाजपा के पास नहीं गए है, उन्हें कांग्रेस में मचे घमासान और गुटबाजी ने वहां जाने को मानो मजबूर कर दिया है।

आज जो दृश्य भाजपा के दिल्ली मुख्यालय से  इंदौर कार्यालय तक कुछ मिनट में उपस्थित हो गया, गुड्डू और उनके बेटे अजीत ने सिलसिलेवार भाजपा का दामन थामने के रूप में सामने आया है। उसकी पटकथा शायद कुछ दिन पहले ही लिख दी गई थी। इस पूरी पटकथा के पीछे भारतीय जनता पार्टी के मालवा के एक बड़े नेता, दिग्गज विधायक और कांग्रेस के एक बड़े नेता का भी रोल माना जा रहा है। गुड्डू भाजपाई हुए तो कांग्रेस को झटका लगाना तय सा था पर भाजपा में इससे एक खेमा खुश नहीं लग रहा है। खासकर उज्जैन की भाजपा में दबे स्वर से इस पर नाराजगी जताई जा रही है। गुड्डू जब उज्जैन के सांसद थे तब उनकी आक्रामक छवी के कारण भाजपा नेताओं से कई बार विवाद और तीखे संवाद भी हुए। अब ऐसे भाजपाइयों के लिए गुड्डू को अपना नेता स्वीकार करना कतई आसान नहीं है। गुड्डू की इस दलबदली के बाद इस सम्भावना ने जन्म ले लिया है कि जल्दी ही कुछ और कांग्रेस नेताओं का भी दिल भाजपा में जाने के लिए अचानक मचल सकता है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और Ghamasan.com के संपादक हैं।

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