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वंशवाद तो इधर भी बढ़ रहा है उधर भी

Posted on: 04 Nov 2018 16:23 by krishnpal rathore
वंशवाद तो इधर भी बढ़ रहा है उधर भी

 मुकेश तिवारी 

([email protected])

 

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की पहली और बड़ी सूची जारी कर दी है.  इस सूची पर अगर गौर किया जाए तो इसमें कई नाम ऐसे हैं जो राजनीति में वंशवाद की बेल को बढ़ाते साफ दिखाई दे रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी जो इस बात को लेकर कांग्रेस पर खूब हमला बोला करती थी कि वह वंशवाद की पोषक है उसने भी ऐसा कहने का नैतिक अधिकार शायद अब पूरी तरह से खो दिया है।

 

 

177 उम्मीदवारों की भाजपा की पहली सूची इस बात की खुलकर गवाही भी दे रही है कि राजनीतिक वंशवाद को उसने खूब अपना लिया है. वह तो एक नए फार्मूले का भी ईजाद कर चुकी है. जिसमे बड़े नेता या मंत्री का टिकट काटना है तो उनके परिवार से ही बेटी, बेटे या रिश्तेदार को टिकट दे दो ताकि नेताजी नाराज ना हों और उनके घर-आंगन में ही हमेशा विधायकी बनी रहे. बाकी वहां के कार्यकर्ता तो जीवन भर झंडे उठाने और दरी बिछाने के लिए हैं ही.

अब कांग्रेस का तो कहना ही क्या उसने कल अपने 155 उम्मीदवारों की जो सूची जारी की उसमे वंशवाद की परंपरा को उसे कायम रखना ही था. अनेक नेताओं के बेटे, बेटियों और रिश्तेदारों को उसने चुनाव मैदान में उतार दिया। एक बड़े नेताजी तो इतने कलाकार निकले कि एक ही लोकसभा क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटों से अपने रिश्तेदारों को टिकट दिला लाए। अब इस पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा तो फूटना ही था, फूटा भी। कार्यकर्ता करे तो करे क्या? कब तक झंडे उठाए, कुर्सियां लगाएं और दरी बिछाएं। दोनों ही दलों में बढ़ते राजनीतिक वंशवाद को लेकर भारी असंतोष है।  कहीं यह प्रकट हो रहा है और कहीं इसे लेकर भीतर ही भीतर विरोध सुलग रहा है। नेताजी इससे नाफ़िक्र हैं और उन्हें लगता है कि पार्टी ने उनके बेटे ,बेटी या रिश्तेदार को टिकट देकर कोई गलती नहीं की है बल्कि उसकी योग्यता का सम्मान किया है। अब सवाल यह है कि योग्य वह कार्यकर्ता है जो बरसों से उस इलाके में झंडे उठा रहा है या विधायक का बेटा और रिश्तेदार। हां,  रायशुमारी सर्वे रिपोर्ट और बड़े नेताओं कि इस बयानबाजी का भी कि पैराशूट से कोई उम्मीदवार नहीं उतरेगा, यह टिकट सूची  खूब मजाक उड़ाती नजर आ रही है।

 

लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और ghamasan.com के संपादक है।

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