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संपूर्ण भारत का संगम ‘मालवा उत्सव’ कल से शुरू, दिखेगी कई राज्यों की संस्कृति | Confluence of Entire India ‘Malwa Festival’ begins tomorrow…

Posted on: 08 Jun 2019 12:37 by shivani Rathore
संपूर्ण भारत का संगम ‘मालवा उत्सव’ कल से शुरू, दिखेगी कई राज्यों की संस्कृति | Confluence of Entire India ‘Malwa Festival’ begins tomorrow…

लोक संस्कृति मंच द्वारा लोक कलाएं एवं लोक संस्कृति पर आधारित मालवा उत्सव ने देश व प्रदेश के साथ विश्व पटल पर मालवा की छवि को उकेरा है एवं देश वह प्रदेश में इंदौर को लोक कला के एक महत्वपूर्ण केंद्र को दर्जा दिलाया है। इस साल 7 दिवसीय मालवा उत्सव का आयोजन लालबाग परिसर में 9 जून से शुरू हो रहा है, जो 16 जून तक चलेगा। देश भर के 21 राज्यों के 400 से अधिक कलाकार एवं 300 शिल्पी एवं अंतर्राष्ट्रीय शिल्पी भी इसमें भाग लेंगे साथ ही स्थानीय कलाकार भी सहभागी होंगे।

लोकमाता देवी अहिल्या को समर्पित होगा मालवा उत्सव उपरोक्त जानकारी देते हुए लोक संस्कृति मंच के संयोजक शंकर लालवानी ने बताया कि इस सालदेवी अहिल्या की 294वीं जयंती मनाई गई और देवी अहिल्या का आशीर्वाद भी हमें प्राप्त हुआ। इसी परिपेक्ष में जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप मालवा उत्सव देवी अहिल्या को समर्पित होगा मालवा उत्सव में उत्तर से लेकर दक्षिण एवं पूर्व से लेकर पश्चिम तक संपूर्ण भारत के कलाकारों के द्वारा लोक कला एवं संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा एवं शिल्प बाजार में भी इनकी छटा दिखाई देगी।

मंच पर मालवा की लोक संस्कृति भी अपना रंग बिखरे गी मालवा उत्सव विगत 19 वर्षों से लोक संस्कृति मंच द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें शहर सहित प्रदेश के लाखों कला प्रेमियों की भागीदारी रहती है जो मालवा अंचल की लोक संस्कृति की विभिन्नता में एकता को दर्शाती है।

मंच की कल्पना महेश्वर के घाट मालवा उत्सव का मन इस वर्ष मालवीय मिट्टी की सौंधी महक के साथ आदर्श की मूर्ति देवी अहिल्या होलकर की मालवा की राजधानी महेश्वर की घाटी प्रतिकृति होगा। दीपक लवंगड़े की कल्पना को पिछले कई दिनों से 50 से ज्यादा कलाकारों के सहयोग से निर्मित किया जा रहा है। मंच के सचिव दीपक लवंगड़े ने बताया कि 130 फीट लंबे और 45 फीट ऊंची प्रतिकृति में घाट की श्रंखला के साथ कई बड़े-बड़े सुंदर नक्काशी दार पिलर दृष्टिगोचर होंगे घाट पर छोटे-छोटे मंदिर के साथ शिवलिंग नदी व किले मोमा दीवार हुई दिखाई देगी।

जिस पर सुंदर कलाकृतियां उभरी हुई होंगी मेले का मुख्य द्वार बादल गेट चंदेरी की प्रतिकृति होगा इसमें मेहरा बदार दरवाजा ही प्रवेश द्वार का काम करता दिखाई देगा। दोनों तरफ बांसुरी नुमा मीनार दिखाई देगी जाली की सजावट फूलदार ग्राउंडेल भी इसमें होंगे जो एक सुंदर जाति में आकृति का नमूना होता।

सिल्क मेला मंच के कार्यालयीन मंत्री सतीश शर्मा ने बताया कि 21 राज्यों के 300 से अधिक शिल्पी शिल्प मेले में अपनी कलाकृतियां लेकर आएंगे, इसमें कई शिल्पी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त है। साथ ही इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय शिल्पी युगांडा थाईलैंड नेपाल भूटान से आएंगे एवं देश से मिजोरम नागालैंड असम अरुणाचल प्रदेश उत्तरांचल उत्तर प्रदेश हरियाणा मध्य प्रदेश राजस्थान उड़ीसा पंजाब कर्नाटक आंध्र प्रदेश छत्तीसगढ़ सहित 21 राज्यों के कलाकार यहां पर अपने कला प्रदर्शित करेंगे। शिल्प मेले में ड्राई फ्लावर पीतल श्री गणेशा फिल्म टेराकोटा मिट्टी शिल्प केन फर्नीचर कारपेट बांस शिल्प लोग सिल्क कपड़ा शुल्क मुक्त होंगे।

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