इंदौर : झारखण्ड में 36 साल पहले दामोदर नदी पर  शुरू हुई रेलवे डायवर्जन परियोजना अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ी है। इस दौरान कई सरकारें आई और गई, लेकिन इसकी तरफ किसी का भी ध्यान नहीं गया है।

दामोदर नदी से कोकिंग कोल निकालने के लिए शुरू की गई ये परियोजना में अभी तक 3000 करोड़ खर्च हो चुके हैं।

आपको बता दे कि ये परियोजना 1989 में पूरी होनी थी और इसके लिए 960 करोड़ की लागत से तैयार होनी थी।

इस योजना के लिए कई बड़े अफसर भी आए और रिटार्यड होकर चले गए लेकिन ये परियोजना अभी तक अटकी पड़ी है। रेलवे के दो-दो पुल अधूरे बने पड़े हैं लोगो से जमीन अधिग्रहण तक हो गई विस्थापितों को नौकरी तक दे दी लेकिन परियोजना के विकास के कोई काम नहीं हुआ।

कई सरकारें आई और गई इस परियोजना की सूद किसी ने भी नहीं ली. क्यों शुरू नहीं हुई यह परियोजना ? क्यों सरकारे मौन रही इस पर ? कब बंद होगा यह भ्रष्टाचार ? इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए देखिये अशोक वानखेड़े की टिप्पणी।

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