इंदौर : मोदी सरकार केंद्र में विदेशों से काला धन भारत में वापस लाने और देश में मौजूद बेनामी संपत्ति को उजागर करने का वादा लिए सत्ता में आई थी।

लेकिन सरकार का अभी तक अपने इन वादों के प्रति साफ नजरियों दिखाई नहीं दे रहा है। अगले साल चुनाव आने को है और देश में काला धन वापस लौटने के कोई आसार नहीं हैं। उल्टा देश के कुछ लोग भारत से पैसा लेकर विदेश भाग गए है।

केंद्र सरकार ने बेनामी संपत्ति लेनदेन के लिए एक कानून बनाया और एक अथॉरिटी गठन करने का फैसला लिया। ताकी उन लोगो के नाम उजागर हो सके जो अपने पास अवैध तौर करोडो रुपए लेकर बैठे हैं। साथ ही केंद्र ने ये भी निर्णय लिया कि जो भी व्यक्ति बेनामी संपत्ति वालो का नाम बताएगा उनको सरकार 1 से 5 करोड़ की बख्शीश देगी।

इसके बाद केंद्र ने 780 से ज्यादा लोगो की बेनामी संपति को कुर्क भी किया लेकिन इस कानून के तहत जिस अथॉरिटी का गठन करना था जो कि इसके बारे में न्यायिक फैसला लेता उसका गठन अभी तक नहीं हुआ। जिसके कारण उन बेनामी संपत्तियों की कुर्की अब शायद वापस देना पड़ेगी। क्योंकि अथॉरिटी का गठन नहीं होने से उन पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा है।

सरकार का ये ढीला रुख अपने आप में एक बड़ा मजाक है। क्या होती है बेनामी संपत्ति ? क्यों अथॉरिटी का गठन नहीं हुआ ? क्या यह कानून लागू हो सकता है ?  इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए देखिए वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े की टिप्पणी।

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