क्या खेड़ी घाट का स्वरूप आने वाले समय में पूरी तरह से बदल जाएगा, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

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अभी 2 दिन पहले खेड़ी घाट जाना हुआ एक दाह संस्कार के सिलसिले में l खेड़ी घाट की स्थिति देखकर ऐसा लगा कि आने वाले समय में इसका स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा l खेड़ी घाट अपने आप में एक ऐतिहासिक स्थल है नर्मदा का विशाल किनारा होने के साथ-साथ यहां पर दाह संस्कार के बाद राख प्रभावित करने की परंपरा चली आ रही है , लेकिन बांध बनने के बाद जिस तेजी से यहां का पानी कम हुआ है उसे ऐसा लग रहा है कि खेड़ी घाट में दाह संस्कार के बाद राख बहाने की परंपरा बंद हो सकती है।khedi ghat

अभी हालत यह है कि खेड़ी घाट पर इतना कम पानी है की एक किनारे से दूसरे किनारे पर आसानी से जाया जा सकता है यदि आप नहाते हुए बीच में भी चले जाए तो आप पूरी तरह से डूबते नहीं इसका मतलब यह है कि यहां पर 5 -7 फुट पानी ही शेष बचा है । अगर यही स्थिति रही तो सवाल इस बात का है कि जो सालों से जो परंपरा चली आ रही है खेड़ी घाट में अंतिम संस्कार के सारे कर्म करने की उसका क्या होगा । खेड़ी घाट में शव का दाह संस्कार भी किया जाता है और बाद में वह राख नर्मदा नदी में प्रवाहित कर दी जाती है ।

khedi ghat 02वर्तमान में बांध बनने के बाद यहां पर रात को 8:00 बजे पानी छोड़ा जाता है उसके बाद नदी लबालब होती है लेकिन बाद में पानी बह जाता है और सुबह होते-होते वापस नदी पुरानी याने कम पानी में लौट आती है । जब पानी छोड़ा जाता है तो घाट किनारे अंतिम संस्कार किए गए लोगों के अवशेष भी उसके साथ बह जाते हैं।

खेड़ी घाट को लेकर यहां के पंडित पुरोहित भी बेहद चिंतित है कि आने वाले समय में अगर यही स्थिति रही तो इस घाट को बचा पाना असंभव हो जाएगा ।

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