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सिक्किम में बतौर सीएम चामलिंग की सिल्वर जुबली के मायने: अजय बोकिल

Posted on: 01 May 2018 06:06 by Ravindra Singh Rana
सिक्किम में बतौर सीएम चामलिंग की सिल्वर जुबली के मायने: अजय बोकिल

हिमालय की गोद में बसे पूर्वोत्तर के छोटे से राज्य सिक्किम के मुख्यंमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने जिस खामोशी और गरिमा के साथ देश में सबसे लंबे समय तक लगातार मुख्य मंत्री रहने का ताज स्व. ज्योति बसु से छीन लिया, उसकी बाकी भारत में खास चर्चा भले न हुई हो, लेकिन यह एक असाधारण उपलब्धि है। चामलिंग 1994 से निरंतर राज्य के मुख्यमंत्री हैं और उन्होने अपने कामकाज और राजनीतिक पकड़ से राज्य में विपक्ष को नगण्य बना दिया है। चामलिंग की अपनी क्षेत्रीय पार्टी सिक्किम डेमो‍क्रेटिक फ्रंट ( एसडीएफ) है।

राज्य की राजनीति इसी के इर्द-गिर्द घूमती है। हाल में भाजपा भी यहां अपनी जमीन तलाशने की पुरजोर कोशिश कर रही है, लेकिन सिक्किम की जातीय राजनीति में कोई मजबूत सिरा उसकी पकड़ में नहीं आ रहा है। कांग्रेस यहां अप्रासंगिक हो चुकी है। यही कारण है कि सत्तारूढ़ एसडीएफ भाजपा के ‘कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर’अभियान का हिस्सा है।

सत्ता की सिल्वर जुबली मनाना किसी भी मुख्यमंत्री की चिर आकांक्षा और अहम उपलब्धि हो सकती है, खासकर तब कि जब सत्ता में रहने के दस, बारह या पन्द्रह साल पूरे होने पर भी राजनीतिक सेलीब्रेशन इस अंदाज में होते हैं कि भाई को कोई हटा ही नहीं पाएगा। ऐसे माहौल में चामलिंग का बगैर बड़े बोल बोले भी सत्ता की रजत जयंती मनाना वाकई ऐतिहासिक है।

सिक्किम करीब साढ़े 6 लाख की आबादी वाला एक छोटा और सुंदर राज्य है। लिंबू भाषा में सिक्किम का अर्थ ‘नव प्रासाद’ और तिब्बती में ‘चावल की घाटी’ होता है। पहले सिक्किम एक अलग संरक्षित देश था। लेकिन भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राज्य में लोकतंत्र समर्थक शक्तियों को हवा दी और सेना भेज कर राजा को नजरबंद कर दिया। भारतीय सेना की मौजूदगी में राज्य में जनमतसंग्रह कराया गया और 97.5 फीसदी लोगों ने सिक्किम के भारत में विलय के पक्ष में मत दिया।

22 मई 1975 को सिक्किम भारत संघ का 22 वां राज्य बन गया। वह भी तब कि जब भारत को अमेरिका सीधे धमका रहा था और चीन इस विलय से बेहद नाराज था। यह ऐतिहासिक घटना देश में इमर्जेंसी लगने के लगभग एक माह पहले की है। इंदिरा गांधी कितनी शक्तिशाली प्रधानमंत्री थीं, इस एक घटना से समझा जा सकता है।

सिक्किम प्रदेश का मुख्य व्यवसाय खेती और पर्यटन है। राज्य की राजनीति स्थानीय मूल निवासियों, उच्च जाति के नेपालियों, नेपाली मूल के सिक्किमियों और भारतीय मूल के सिक्किमियों के बीच बंटी हुई है। लिंबू, तमांग जैसे समुदाय आदिवासी श्रेणी में हैं। नेपाली मूल के लोगों के लगातार आव्रजन से सिक्किम में उनकी आबादी 80 फीसदी हो चुकी है। चामलिंग नेपाली मूल के हैं और किसान परिवार से आते हैं। पहले वो सिक्किम संग्राम परिषद में थे। बाद में उससे अलग होकर उन्होने 1994 में एसडीएफ बनाई। तब से वो लगातार सत्ता में हैं। मेट्रिक पास चामलिंग की दो पत्नियां,चार बेटे और चार बेटियां हैं। चामलिंग नेपाली के लेखक भी हैं। इसके लिए उन्हे भानु पुरस्कार भी मिल चुका है।

सवाल पूछा जा सकता है कि चामलिंग ने 25 सालों में ऐसा क्या किया है कि कोई उन्हें सत्ता से डिगा नहीं सका। वे पूरी तरह निर्विवाद रहे हों, ऐसा भी नहीं है। फिर भी कई उपलब्धियां चामलिंग के खाते में हैं। पहला तो यह कि सिक्किम को एक सक्षम और सुशासित राज्य बनाना। आज सिक्किम में साक्षरता 82.5 प्रतिशत है। राज्य में तीन साल पहले आए विनाशकारी भूकंप के बाद भी सिक्किम साल भर में फिर से खड़ा हो गया।

सिक्किम देश का सर्वाधिक इलायची पैदा करने वाला राज्य भी है। लेकिन राज्य की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका जैविक खेती में देश में नंबर वन होना है। आज राज्य के 75 हजार हेक्टेयर में जैविक खेती होती है। इसीलिए सिक्किम को ‘जैविक राज्य’ भी कहा जाता है। चामलिंग का दावा है कि उनकी सरकार की नीतियां गरीब और लोक हितैषी हैं। इसलिए विपक्ष के दुष्प्रचार को सिक्किमी जनता ने कभी ज्यादा तवज्जो नहीं दी। पिछले विधानसभा चुनाव में भी 32 सदस्यीय विधानसभा में चामलिंग की पार्टी ने 22 सीटें जीतीं थीं, जबकि 10 सीटें विपक्षी सिक्किम क्रांतिकारी परिषद को मिलीं।

चामलिंग अगला चुनाव भी जीतेंगे, इसमें शायद ही किसी को संदेह हो। क्योंकि राजनीतिक मुददों को उठाना और भुनाना उन्हें खूब आता है। चामलिंग का नया नारा है ‘सिक्किम को आदिवासी राज्य बनाना।‘ इसके लिए राज्य सरकार ने 11 समुदायों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा है। गेंद अब मोदी सरकार के पाले में है। इसका भाजपा कितना फायदा उठा पाएगी, कहना मुश्किल है। लेकिन चामलिंग जरूर उठाएंगे, यह तय है। अपने कार्यकाल के 25 साल पूरे होने पर चामलिंग ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यलमंत्री और कम्यु‍निस्ट नेता ज्योति बसु को भी याद किया। उन्होने कहा मेरी सफलता के पीछे ज्योति दा की प्रेरणा है। यह बात अलग है कि ज्योति बसु के हटते ही बंगाल में वामपंथी आंदोलन का सूर्य भी अस्ताचल की अोर चला गया।

तो क्या व्यक्ति की सफलता ही व्यवस्था और विचार की सफलताएं भी होती हैं? या विचार ही व्यक्ति को बनाता है? ज्योति बाबू के पीछे एक ठोस दर्शन और संगठन खड़ा था। लेकिन चामलिंग के पास ऐसा कोई स्थापित दर्शन या बड़ी संगठन शक्ति भी नहीं है। उनका व्यक्तित्व भी बहुत चमत्कारी हो, ऐसा नहीं लगता। फिर भी उनकी सत्ता की जड़ें इतनी मजबूत हैं तो एक सामान्य से लगने वाले इस राजनेता में यकीनन कोई लौह तत्व तो है। चामलिंग जन आकांक्षाअों को समझने वाले नेता हैं।

घोषणावीरता से ज्यादा उन्होने राज्य और राज्य की जनता की जरूरतों को समझने और उसे पूरा करने की दिशा में कदम उठाए हैं। चामलिंग ने अब सिक्किम की जनता को ‘नया सिक्किम, सुखी सिक्किम’ का सपना दिखाया है। कुछ लोग कह सकते हैं कि चामलिंग ने जो कर दिखाया है, वह छोटे से राज्य में ही संभव है। लेकिन यह मानना इसलिए सही नहीं है, क्योंकि सिक्किम में जातीय विविधता और तनाव इतने हैं कि सबको साथ लेकर और पूर्ण संकल्प शक्ति से ही आगे बढ़ा जा सकता है। चामलिंग की सफलता का राज भी शायद यही है।

अजय बोकिल

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