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सफाईकर्मी की बेटी को मिली एक करोड़ की स्कॉलरशिप | Cleaner’s Daughter got 1 crore scholarship

Posted on: 09 May 2019 16:05 by Surbhi Bhawsar
सफाईकर्मी की बेटी को मिली एक करोड़ की स्कॉलरशिप | Cleaner’s Daughter got 1 crore scholarship

इंदौर की सोमनाथ महाराज जूनी चाल से सटी बस्ती न्यू विकास नगर में वाल्मिकी समाज के ज्यादातर लोग रहते है। अठारह से बीस साल के बीच होते ही विवाह कर दिया जाता है। इस बस्ती में ग्रेजुएट लड़कियों की संख्या नहीं मिलेगी। 60 नंबर के मकान में रोहिणी ने फॉरेन ट्रेड की पढ़ाई बीबीए से और उसके बाद एमबीए मार्केटिंग में किया है। मध्यप्रदेश सरकार के एसटी विभाग ने इस पढ़ाकू छात्रा को पूरे एक करोड़ रूपये की स्कॉलरशिप दी है, ताकि वह विदेश से पीएचडी कर सके।

एडिनबर्ग के हैरिटगॉट विश्व विद्यालय से रोहिणी यह पढ़ाई कर रही है। रोहिणी की मां नूतन कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल में सफाईकर्मी है। रोहिणी कहती है- जब हम जात समाज के विवाह या अन्य समारोह में जाते है, तो मेरे माता-पिता को ताने उलाहने के अंदाज में कहा जाता था, लड़की कितनी बड़ी हो गई है, शादी कब करोगे। ज्यादा रुकोगे तो वर नहीं मिलेगा। जब एक करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिली तो वे ही लोग बच्चे से कहने लगे है कि दिल लगाकर पढो लिखो। रोहिणी की तरह विदेश में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा।

वाल्मिकी समाज ने हाल में रोहिणी का सम्मान किया है. उसके पिता एसके घावरी बताते है- वह बचपन से ही पढ़ाकू थी। केंद्रीय विद्यालय में हमेश पहले नंबर पर पास हुई थी। मां नूतन कहती है मैंने उसे कहा था खूब पढ़ो। समाज की चिंता मत करो। तुम्हे भी मेरी तरह काम करना पड़ेगा।

मायावती को अपना आदर्श मानने वाली रोहिणी ने अपने दस बाय दस के कमरे में बाबा भीमराव आंबेडकर का चित्र लगा रखा है। वह कहती है हमारे यहां पारिवारिक हिंसा आम बात है। लोग मुफ्त में पड़ोसियों को गीत-संगीत सुनाते है इसलिए मैं कॉलेज या जरुरी काम से जाने के लिए ही बाहर निकलती थी। मेरा पूरा ध्यान पढ़ाई पर रहता था। आज भी उसी तरह पढ़ती हूं। मेरा विषय ग्रीन मार्केटिंग है। एंड्राइड मोबाइल फोन पर ग्रुप डिस्कशन करती हूं। यह मैटर नहीं करता कि मैं कहां रहती हूं।मेरी साधना अर्जुन की तरह मछली की आँख पर रही। मैं खासकर दलित लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना चाहती हूं। मैं गौतमबुद्ध एजुकेशन एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष नीरज राठौर की शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया।

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