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एक जैसा है जीवनसाथी और सरकार चुनना | Choosing a life partner and government is the same.

Posted on: 10 Mar 2019 12:42 by Surbhi Bhawsar
एक जैसा है जीवनसाथी और सरकार चुनना | Choosing a life partner and government is the same.

नीरज राठौर

कहते हैं कि जोड़ियां ऊपर से बनकर आती हैं लेकिन देखने में आता है कि जोड़ियां मां-बाप, रिश्तेदार, परिवार के लोग ही बनाते हैं और यदि कोई खुद ही खुदा के भेजे बन्दे को अपना जोड़ीदार बना ले, तो परिवार कई बार इतना क्रोधित हो जाता है कि दोनों की हत्या करने से भी परहेज नहीं करता |

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यही सिद्धांत सरकार चुनते समय भी समाज में लागू होता है | कहा जाता है कि जनता अपना नेता चुनती है लोकतंत्र में जबकि होता यह है कि पार्टियाँ पहले नेता चुनती हैं और फिर जनता से कहती है इसे चुनो क्योंकि हमने इसे चुना है प्रत्याशी के रूप में| यदि कोई विरोध करता है तो फिर उनके इलाज के लिए आईटी सेल के एक्सपर्ट होते हैं, गुंडों-मवालियों की कई सेनायें होती हैं |

सरकार चुनना हो या जीवन साथी चुनना हो, तय कोई और करता है कि किसे चुनना है और फिर कहा जाता है कि हमने तो पूरी स्वतंत्रता दे रखी है, किसी पर कुछ थोपा नहीं | अब जनता ठगी जाए या नवदंपत्ति स्वयं को ठगा हुआ महसूस करें, तो कहा जाएगा कि तुमने ही चुना था अब तुम्ही भुगतो |

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जीवनसाथी चुनना और नेता या सरकार चुनना एक ही बात नहीं है | जीवन साथी को यदि ढोना पड़ रहा है, झेलना पड़ रहा है सरकार की तरह, तो इसका अर्थ यह हुआ कि जीवन साथी मिला ही नहीं अभी तक आपको |

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