नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच रिश्तें लगातार मजबूत होते जा रहे हैं. फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आए थे और भारत ने ट्रंप का जोरदार स्वागत किया था. वहीं इससे पहले पीएम मोदी का अमेरिका में यादगार स्वागत हुआ था. जबकि अब दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक मजबूती के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और अमेरिका के रक्षा मंत्री एस्पर ने भारत का दौरा किया है. जहां दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चाएं हुई हैं. जबकि एक अहम समझौता पर भी सहमति बनी है.

बता दें कि मंगलवार को अमेरिका के दोनों मंत्री मार्क एस्पर और माइक पोम्पियो भारत आए थे. इस दौरान दोनों ही अमेरिकी मंत्री खुलकर भारत के समर्थन में दिखें. दोनों ही मंत्रियों के 2+2 मंत्रीस्तरीय संवाद में इस दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हिस्सा लिया था. वहीं बाद में एस्पर और पोम्पियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले थे. इसके साथ ही मार्क एस्पर और माइक पोम्पियो ने बीते माह गलवान घाटी में हिंसक झड़प में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को भी नमन किया. लेकिन अब भारत-अमेरिका के बीच बढ़ती नज़दीकी और अमेरिकी मंत्रियों द्वारा भारत के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देना चीन को नागवार गुजरा है और उसने इस पर अपनी भड़ास भी निकाली है.

भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते रिश्ते पर भारत के पड़ोसी देश चीन का भी बयान सामने आ गया है. जहां चीन को भारत और अमेरका की यह मुलाक़ात कतई रास नहीं आई है. हमेशा भारत के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाले चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक बार फिर जहर उगला है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, अमेरिका के विदेश मंत्री पोम्पियो और अमेरिका के रक्षा मंत्री एस्पर ने गलवान घाटी में शहीद हुए भारतीय जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की है. भारत में इस दृश्य को देखकर भारतीय अभिभूत हो गए.

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा कि अमेरिका के मंत्री भारत में आकर भारतीय जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जबकि कोरोना के कारण मृत अमेरिकियों को श्रद्धांजलि नहीं दी गई. चीन की सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक संपादकीय में आगे लिखा कि, यह महज छलावे से भरा तोहफा है और कुछ भी नहीं.