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पहली क्लास के बच्चें भी हो रहे डिप्रेस : प्रीति चोपड़ा माहेश्वरी

Posted on: 16 Jun 2018 07:03 by hemlata lovanshi
पहली क्लास के बच्चें भी हो रहे डिप्रेस : प्रीति चोपड़ा माहेश्वरी

इंदौर: पिछले पांच सालों में डिप्रेशन की प्रॉब्लम इतनी बढ़ गई है कि अब ओल्डएज, यंगस्टर्स के साथ ही बच्चों को काउंसलर की जरूरत पड़ रही है। यह एक चिंता का विषय है। बढ़ते डिप्रेशन पर बिहेवियर कंसल्टेंट प्रीति चोपड़ा माहेश्वरी ने ghamasan.com से चर्चा की।

टीनेजर्स, ओल्डएज के साथ ही अब डिप्रेशन की प्रॉब्लम बच्चों में फस्र्ट स्टैंडर्ड से हो रही है। हर ग्रुप के लोगों को काउंसरल की जरूरत पड़ रही है। सभी सेक्टर में काम कर रहे लोग भी डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा कॉर्पोरेट सेक्टर में।priti 1डिप्रेशन होने के कई कारण हो सकते है। फैमली प्रॉब्लम, रिलेशनशिप, कॉम्प्लेक्शन प्रॉब्लम, फ्रेंडशिप, इंटरनेट का मिस यूज़, सिंगल रहना, जॉब सटिस्फैक्शन न होना, एग्जाम फोबिया, वर्क प्रेशर, सक्सेस प्रॉब्लम आदि।

ओल्डएज नहीं करते थॉट चेंजpriti 2मेरे पास हर उम्र के लोग आते हैं। बच्चें, टीनेजर्स की काउं​सलिंग में इतनी प्रॉब्लम नहीं आती। लेकिन ओल्डएज लोगों की काउं​सलिंग में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इस उम्र के लोग अपनी थॉट चेंज नहीं करते। हर चीज बदल गई है उसे स्वीकार करने का तैयार ही नहीं होते। ऐसे में उन्हें कोई बात समझाना मुश्किल हो जाता है।

पेरेंट्स के साथ टीचर्स की हो काउंसलिंगpriti 6घर में पेरेंट्स और क्लॉस रूम में बच्चा टीचर के साथ ज्यादा रहता है। कई बार बच्चों को पेरेंट्स और टीचर द्वारा इग्नोर करने पर हीनभावना आने लगती है। धीरे-धीरे बच्चें गुस्सैल हो जाते हैं। बच्चों का मन कोमल होता है। ऐसे में बच्चों पर खास ध्यान देने की जरूरी होती है। बच्चों से ज्यादा पेरेंट्स और टीचर्स की काउंसलिंग होनी चाहिए, ताकि बच्चों की समस्यां समझकर सही तरह से गाइड किया जा सकें।

दिमागी तौर पर कमजोर priti 4हालात ये हो गए हैं कि अब केवल मेडिसिन से काम नहीं चलता। काउंसलिंग की जरूरत भी होती है। पहले दिमागी परेशानी होने पर ही डॉक्टर के पास जाते थे। अब कोई भी परेशानी हो लोगों को काउंसलर की जरूरत होती है। लोगों की मानसिक स्थिति यह हो गई है कि दवार्इयों के साथ काउंसलिंग करना पड़ती है। दिमागी तौर पर कमजोर हो रहे हैं।

जल्दी समझते हैं स्पेशल स्कूल के बच्चें priti 3मैं स्पेशल स्कूल के बच्चों की काउंसलिंग करती हूं। मुझे लगता है कि ऐसे बच्चें हर बात जल्द समझते हैं। बस इन्हें प्यार की जरूरत होती है। इन बच्चों के पेरेंट्स ज्यादा संघर्ष करते हैं। जिम्मेदारियां ज्यादा होती हैं। ऐसे बच्चों के पेरेंट्स की जॉब टफ होती है।

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