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छत्तीसगढ़ में ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ कर रहे नक्सलियों की नाक में दम | Chattisgarh ‘Danteshwari Ladake’ fighting hard against Naxals…

Posted on: 10 May 2019 14:41 by Parikshit Yadav
छत्तीसगढ़ में ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ कर रहे नक्सलियों की नाक में दम | Chattisgarh ‘Danteshwari Ladake’ fighting hard against Naxals…

रायपुर। कुछ साल पहले तक वे नक्सली थीं, लेकिन आज नक्सलियों के खिलाफ जंग लड़ रही हैं। आत्म समर्पण कर चुकी और सलवां जुडुम की पीडि़त महिलाएं वैसे तो सरेंडर के बाद ज्यादातर घरेलू कामों में व्यस्त हो जाती हैं, लेकिन इनमें से कुछ हाथों में एके-47 लेकर नक्सलियों के खिलाफ जंग में अग्रिम मोर्चे पर हैं।
छत्तीसगढ़ की संरक्षक देवी के नाम पर इन महिला कमांडो को ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ के नाम से जाना जाता है। इन कमांडो ने नक्सलियों के खिलाफ एक ऑपरेशन में हिस्सा लिया, जिसमें 2 नक्सली मारे गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर लड़ रहीं इन महिला कमांडो ने एक महीने में 5 नक्सलियों को ढेर किया है। यह प्रयोग दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव का ब्रेन चाइल्ड है। वह कहते हैं कि 4 महीने पहले जब उन्होंने आत्म समर्पण कर चुके नक्सलियों के एक कैंप का दौरा किया तो उनके दिमाग में यह विचार आया।

पल्लव ने बताया कि एक तरफ जहां ज्यादा पूर्व पुरुष नक्सलियों को प्रशिक्षित करने के बाद उन्हें डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड में भर्ती कर लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ महिलाएं घरों में बैठ क र रोटी बना रही थीं। इस चीज ने उन्हें कुंठित कर दिया, क्योंकि वे जंगल में पुरुषों के साथ बराबरी से रहीं और अब उनकी सेवा कर रही हैं। इससे उनके अंदर कमजोर और कमतरी का अहसास होता था। उन्होंने तब डिस्ट्रिक्ट एसपी दिनेश्वरी नंदा से महिला कमांडोज की एक एकीकृत कॉम्बैट फोर्स बनाने के लिए कहा। 30 महिलाओं को चुना गया और उन्हें ब्रिगेडियर बीके पोंवार (रिटायर्ड) द्वारा संचालित कांकेर जंगल वॉर फेयर कॉलेज भेजा गया। वहां दिसंबर में उन्हें 6 हफ्तों की कड़ी कॉम्बैट ट्रेनिंग दी गई और उसके बाद मार्च तक इन-हाउस ट्रेनिंग दी गई। पल्लव ने बताया कि इसके बाद फील्ड ट्रेनिंग के लिए वे छोटे ऑपरेशनों में जाने लगीं और अब बड़े ऑपरेशंस के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

पल्लव ने बताया कि इस पहल ने महिलाओं के आत्म-गौरव को फिर से स्थापित किया। उन्होंने बताया कि जब एक माओवादी जोड़े ने सरेंडर किया था तो वे आगे भी सामंजस्य के साथ काम करना चाहते थे। दंतेश्वरी लड़ाके, महिला और पुरुष कमांडोज का समूह है, जो जंगल में रहने और लडऩे में पारंगत हैं।दंतेवाड़ा के एसपी ने बताया कि इससे और ज्यादा महिला नक्सलियों को सरेंडर करने की प्रेरणा मिलेगी। फिलहाल, सरेंडर कर चुके नक्सलियों में पुरुष-महिला का अनुपात 90:10 का है। पल्लवव ने बताया कि महिला कमांडोज कुछ मायनों में परफेक्ट हैं। वे अपने हथियारों को अपनी साडिय़ों में छिपा सकती हैं और किसी को कोई शक हुए बिना ही नक्सलियों पर नजर रख सकती हैं। इतना ही नहीं, वे भीड़ में आसानी से घुल जाती हैं।डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड्स, स्थानीय आदिवासी युवाओं से बना है, जिनमें सरेंडर कर चुके नक्सली भी शामिल हैं। लाल आतंक के खिलाफ लड़ाई में इन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। दंतेवाड़ा में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड्स की 5 यूनिट हैं और पहली बार बस्तर क्षेत्र के किसी जिले में महिला कमांडोज भी शामिल हैं। पल्लव कहते हैं, अब वे यूनिफॉर्म में फिर से लौटने पर खुश हैं। अब वे एक अलग विचारधारा के साथ लड़ रही हैं।

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