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जयपुर में ज्योति खंडेलवाल के कारण बदल गया चुनावी गणित | Changed election due to Jyoti Khandelwal in JaipurChanged election due to Jyoti Khandelwal in Jaipur

Posted on: 31 Mar 2019 18:34 by Surbhi Bhawsar
जयपुर में ज्योति खंडेलवाल के कारण बदल गया चुनावी गणित  | Changed election due to Jyoti Khandelwal in JaipurChanged election due to Jyoti Khandelwal in Jaipur

वरिष्ठ पत्रकार ऋषिकेश राजोरिया

राजस्थान में कांग्रेस गंभीरता से चुनाव लड़ती दिख रही है। यह इससे लगता है कि जयपुर से ज्योति खंडेलवाल को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। जयपुर भाजपा का गढ़ रहा है। यहां से सिर्फ एक बार महेश जोशी को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीतते हुए देखा गया था, जब वे गिरधारी लाल भार्गव के निधन के बाद जयपुर से चुनाव लड़े थे। गिरधारी लाल भार्गव जयपुर के आदर्श सांसद थे। वे लगातार छह बार जयपुर से लोकसभा सांसद रहे। उनका जीवन एकदम सहज सरल था और जनता के सुख-दुख में वे हमेशा उपलब्ध रहते थे। जन्म, मरण और परण में वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की भरसक कोशिश करते थे। शहर में होने वाली तमाम तीये की बैठकों में या तो वे स्वयं मौजूद रहते या अपना संदेश अवश्य भिजवाते थे। शादी के कार्यक्रमों में भी उनकी उपस्थिति रहती थी या उनकी तरफ से शुभकामना संदेश भेजे जाते थे।

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जयपुर में पहली बार गिरधारी लाल भार्गव ने भवानी सिंह को हराया था, जो पूर्व जयपुर राजघराने के राजा माने जाते थे। तब इस चुनाव को राजा बनाम रंक की उपमा दी गई थी। उसके बाद से संसद में जयपुर के प्रतिनिधि के रूप में गिरधारी लाल भार्गव की लगातार 25 वर्षों से ज्यादा उपस्थिति रही। जयपुर में कोई भी काम हो जो वे कर सकते थे, उसके लिए वे हमेशा उपलब्ध रहते थे। उनके निधन के बाद जयपुर में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया था। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के जीतने का सिलसिला टूटा और महेश जोशी ने भाजपा प्रत्याशी घनश्याम तिवाड़ी को हरा दिया था।

2014 के चुनाव में मोदी लहर में रामचरण वोहरा की लाटरी खुली और वे करीब 6 लाख वोटों से चुनाव जीते, जबकि राजनीतिक उपलब्धियों में उनके खाते में एक जिला परिषद का चुनाव दर्ज था। रामचरण वोहरा को भाजपा ने इस बार फिर से टिकट दिया था और जब तक कांग्रेस के उम्मीदवार घोषित नहीं हुए थे, तब तक उनकी जीत पक्की मानी जा रही थी। हालांकि सांसद के रूप में शहर में उनकी भूमिका निराशाजनक ही रही है, लेकिन इस समय भाजपा को योग्य-अयोग्य की चिंता किए बगैर सिर्फ लोकसभा में अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाना है और हर तरह के उम्मीदवार को जिता लाने का बीड़ा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने उठा रखा है।

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जयपुर से इस बार भाजपा उम्मीदवार बदलने की चर्चा थी, लेकिन वोहरा 6 लाख वोटों से जीते थे। किसी अन्य उम्मीदवार को टिकट देने से विवाद भी हो सकते थे, इसलिए भाजपा ने वोहरा का टिकट नहीं काटा। कांग्रेस के सामने जयपुर में समस्या थी कि किसको टिकट दे। आखिरकार कांग्रेस ने ज्योति खंडेलवाल को उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया। ज्योति खंडेलवाल जयपुर महापौर के सीधे चुनाव में भाजपा की सुमन शर्मा को हरा चुकी हैं और पीएचडी हैं। उन्हें जयपुर के लोग जुझारू महापौर के रूप में जानते हैं और वे अपने कार्यकाल में काफी सक्रिय रही हैं। जैसे ही कांग्रेस ने ज्योति को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की, अखबारों में हैडलाइन लगी कि जयपुर में ब्राह्मण और वैश्य उम्मीदवार के बीच मुकाबला होगा। अर्थात उम्मीदवार की घोषणा होते ही जातिवादी प्रचार शुरू।

ज्योति खंडेलवार के जयपुर में कांग्रेस उम्मीदवार बनने से रामचरण वोहरा की जीत अब पक्की नहीं रह गई है। जो तमाम वोट मोदी के नाम पर भाजपा को मिलने वाले थे, उनमें से कई वोट अब ज्योति खंडेलवाल के नाम पर कांग्रेस को मिल जाएंगे। इस माहौल में ज्योति खंडेलवाल चुनाव जीत भी सकती है। चुनाव में कांग्रेस और भाजपा, दोनों पार्टियों की समस्या है कि लोकसभा और विधानसभा की जितनी सीटें हैं, उसकी तुलना में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं। जो विधायक बन चुके हैं, उनको लोकसभा चुनाव के टिकट भी देने पर विचार होता है। अगर वे लोकसभा चुनाव जीतते हैं तो विधानसभा की सीटें खाली होती हैं और उपचुनाव में फिर नए उम्मीदवार की तलाश करनी पड़ती है।

ज्योति खंडेलवाल महापौर पद से हटने के बाद सक्रिय नहीं थी। लोकसभा उम्मीदवार बनने के बाद अब वे फिर से जयपुर में सक्रिय हैं और भाजपा के सामने तगड़ी चुनौती पेश करने वाली हैं। उनकी उम्मीदवारी से जयपुर लोकसभा सीट का गणित एकदम बदल गया है। कांग्रेस अब जयपुर की सीट जीतने की उम्मीद कर सकती है और भाजपा को जयपुर की सीट बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। इस तरह जयपुर में लोकसभा चुनाव अब एकतरफा नहीं रहा। लोगों को रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा।

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