इंदौर का दारू club सरकार की अरबों रुपये की जमीन पर चंडूखाने की सौगात, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

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इंदौर में अरबों की जमीन पर चंडूखाने की कोई सौगात मिली हुई है तो वह जगह है इंदौर दारू क्लब । इसकी विशेषता यह है कि यहां की जमीन सरकार ने नाम मात्र की राशि पर लीज पर दी है और शहर के नामी गिरामी रईस यहां पर शाम होते ही चंडूखाने का हिस्सा बन जाते हैं। चंडूखाने के साथ ही ताश पत्ते भी खेले जाते हैं।

विडंबना देखिए कि अगर किसी को शराब की दुकान के साथ अहाता खोलना हो तो उसे सरकार को लाखों रुपए चुकाना पड़ते हैं। लेकिन शहर के बीचों बीच स्थित इस चंडूखाने के लिए कहीं कोई नियम कोई कायदा नहीं है आखिर ऐसा क्यों है, क्योंकि यहां पर सारे शहर के रईस एक साथ बैठते हैं और रईसों के लिए सरकार के नियम अलग होते हैं और बेचारे गरीब लोगों के लिए अलग ।

शहर के बीचोबीच बने चंडूखाने में दारू की महफिल जमने के बाद जो चर्चाएं होती हैं वे भी लाजवाब रहती है । उन चर्चाओं का अर्थ कुछ इस तरह से रहता है किस शहर के वे तमाम लोग मूर्ख हैं जो इस चंडूखाने के सदस्य नहीं है या जो यहां पर आने की हिमाकत भी नहीं कर सकते ,यह जगह ही कुछ ऐसी है यहां बैठने के बाद सभी बादशाह बन जाते हैं और लोगों की छीछालेदर शुरू कर देते हैं

ओर इस चर्चा का भावार्थ यही रहता है ,देखो सरकार द्वारा दी गई मुफ्त की जमीन पर हमने अपनी अय्याशी के लिए कैसे-कैसे साधन जुटा लिए है और दूसरी तरफ उन लोगों की किस्मत देखिए जो शराब की दुकानों से शराब खरीद कर ₹20 छाप अहाते में धक्के खाते फिरते हैं । धन्य है मेरे शहर का यह चंडूखाना और धन्य है इस चंडूखाने के लिए जमीन देने वाली सरकार

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