चंद्रयान-2ः तीन महीने की मेहनत, और भारतीय इंजीनियर ने ढूंढ निकाला विक्रम लैंडर

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नई दिल्ली। सोमवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। नासा ने अपने ट्वीट के जरिए जानकारी दी है कि उसके लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर ने चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को ढूढ़ लिया है। नासा के मुताबिक, विक्रम लैंडर का मलबा उसके क्रैश होने की जगह से करीब 750 मीटर दूर मिला है। इस काम में चेन्नई के एक इंजीनियर की भूमिका सबसे बहम बताई जा रही है

षनमुगा सुब्रमण्यम एक मैकेनिकल इंजीनियर और कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं जो लेनोक्स इंडिया टेक्नोलॉजी सेंटर चेन्नई में काम करते हैं। मदुरई के रहने वाले षनमुगा इससे पहले कॉग्निजेंट में प्रोग्राम एनालिस्ट के तौर पर भी काम कर चुके हैं। बता दें कि नासा के मून लूनर रिकॉनेसेंस ऑर्बिटर से भेजी गई 17 सितंबर, 14,15 अक्टूबर और 11 नवंबर को ली गई तस्वीरों का हफ्तों तक अध्ययन करने के बाद मलबे की पहचान की।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नासा ने सोमवार की रात करीब 1ः30 बजे विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की तस्वीर जारी की और बताया कि उसके ऑर्बिटर को विक्रम लैंडर के तीन टुकड़े मिले हैं। नासा के अनुसार, लैंडर की तस्वीर एक किलोमीटर की दूरी से ली गई है। सिर्फ इतना ही नहीं, इस तस्वीर में सॉइल इम्पैक्ट भी देखा गया है, तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि चांद की सतह पर जहां विक्रम लैंडर गिरा वहां सॉइल डिसटर्बेंस (मिट्टी को नुकसान) भी हुआ है।

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