चंद्रयान-2: चांद पर ढलता दिन, अब विक्रम से संपर्क करना और भी मुश्किल

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अंतरिक्ष में जा पहुंचे चंद्रयान-2 का जमीनी सतह से संपर्क टूटने के बाद से ही इसरो की टीम इससे दोबारा संपर्क बनाए रखने की हर कोशिश कर रहे हैं लेकिन जैसे जैसे समय बढ़ रहा है संपर्क बनने की संभावना भी कम होती जा रही हैं।

चांद का एक दिन यानी सूरज की रोशनी वाला पूरा समय पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है। विक्रम लैंडर 7 सितंबर को सुबह 1ः50 के करीब चांद पर गिरा था। जिस समय लैंडर चांद के दक्षिण क्षेत्र में गिरा था तब चांद के दक्षिण ध्रुव पर सुबह हो रही थी। यानी 20 या 21 सितंबर को चांद पर रात हो जाएगी। 14 दिन काम करने का मिशन लेकर गए विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के मिशन का टाइम पूरा हो जाएगा।

आज 16 सितंबर है, यानी चांद पर 20-21 सितंबर को होने वाली रात से कुछ घंटे पहले का वक्त। चांद पर शाम का वक्त शुरू हो चुका है। चांद पर दिन का ढ़लना शुरु हो चुका हैं, धीरे धीरे चांद के दक्षिण ध्रुव से सूरज की रोशनी खत्म होते जाएगी जिससे संपर्क बनाने की संभावना पूरी तरह ही खत्म हो जाएगी। इसके बाद तो बस कोई चमत्कार ही चंद्रयान-2 से दोबारा संपर्क करवा सकता हैं।

चंद्रयान-2 से दोबारा संपर्क बनाने के लिए इसरो की मदद के लिए नासा ने भी अपने डीप स्पेस नेटवर्क के तीन सेंटर्स से लगातार चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर और लैंडर से संपर्क बनाने की कोशिश में हैं। ये तीन सेंटर्स- स्पेन के मैड्रिड, अमेरिका के कैलिफोर्निया का गोल्डस्टोन और ऑस्ट्रेलिया का कैनबरा हैं। इस तीन जगहों पर लगे ताकतवर एंटीना चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से तो संपर्क साधे जा रहे है लेकिन विक्रम लैंडर को भेजे जा रहे संदेशों का कोई जवाब नहीं आ रहा हैं।

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