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पीड़ितों की मदद करने वाला आज ख़ुद सरकारी मदद के लिए परेशान

Posted on: 28 Apr 2019 14:22 by Surbhi Bhawsar
पीड़ितों की मदद करने वाला आज ख़ुद सरकारी मदद के लिए परेशान

इंदौर। जुनून और जज़्बे के साथ नंदानगर क्षेत्र में थैलेसीमिया से पीड़ित गरीब बच्चों की मदद करने वाली संस्था मध्यप्रदेश थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर शर्मा ख़ुद गंभीर संक्रमित बीमारी से पीड़ित हो गए हैं।थैलेसीमिया से हज़ारों बच्चों की जान बचाने वाले चन्द्रशेखर शर्मा आज ख़ुद ज़िन्दगी से लड़ रहे हैं।उनको लंग्स कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी ह इलाज और ऑपरेशन बहुत महंगा होगा और तक़रीबन छह लाख रुपये खर्च आना है।जिसके लिए चंद्रशेखर शर्मा ने बड़ी आस के साथ मुख्यमंत्री सहित मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्रियों से मदद मांगी है।

गौरतलब रहे पिछले कई वर्षों से थैलेसीमिया चैरिटेबल हॉस्पिटल के माध्यम से थैलेसीमिया पीड़ितों का इलाज करवाने वाले चन्द्रशेखर शर्मा थेलेसिमिया पीड़ित बच्चों के तिल्ली के ऑपरेशन के दौरान संक्रमण का शिकार हो गए।इसके चलते उनके लंग्स का ऑपरेशन होना ही है।जिसमें लाखों रुपयों खर्च आना है और वक़्त कम है।लंग्स का ये ऑपरेशन सीएचएल अपोलो हॉस्पिटल में कैंसर सर्जन डॉ. अश्विन रोगोले द्वारा क्या जाना चाहिए। ऑपरेशन और इलाज के लिए चंद्रशेखर शर्मा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ,सज्जनसिंह वर्मा, तुलसी सिलावट, जीतू पटवारी से सरकारी मदद की गुहार की है।क़ाबिले गौर बात ये है कि मध्यप्रदेश थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर शर्मा ने पिछले 30 सालों में थैलेसीमिया से पीड़ित हज़ारों बच्चों के इलाज और ऑपरेशन के साथ निशुल्क दवाई वितरण कर मदद करते आये हैं और हज़ारों बच्चों का जीवन बचने का काम किया है।अपना घर जला कर दूसरों के लिए रोशनी करने वाले चन्द्रशेखर शर्मा की मदद के लिए आज कोई उनका साथ दे रहा है।उन्हें अफसोस इस बात का है कि थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी के प्रत्येक आयोजन में सज्जनसिंह वर्मा और पंडित कृपाशंकर शुक्ला के आतिथ्य के बगैर नहीं होते थे,लेकिन इनमें से किसी ने टेलीफोन करके नहीं पूछा कि क्या हाल हैं, या क्या बीमारी है?जबकि ये चाहें तो चन्द्रशेखर शर्मा को तत्काल सरकारी मदद मिल सकती है।

अपने मासूम बच्चे की तड़प से संस्था आयी वजूद में

चन्द्रशेखर शर्मा की कहानी बड़ी दर्दभरी है।बताते हैं कि 1990 में उनके यहां लड़का होने की खुशखबरी ज़्यादा दिन नहीं ठहर सकी।चार महीने की नन्ही जान को ब्लड चढ़ाना शुरू कर दिया।थेलेसिमिया से पीड़ित लाडले की तकलीफ देखते नहीं बनती थी,उसके दर्द को महसूस किया और ऐसे बच्चों के लिए तभी से चन्द्रशेखर शर्मा ने संस्था बनाकर अपनी जेब से ही मदद करना और जागरूक करना शुरू कर दिया।हालांकि उनकी आंख का तारा ज़्यादा दिन नहीं जी पाया,बच्चे की मौत का चन्द्रशेखर शर्मा के जहन पर बहुत असर पड़ा और उन्होंने थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए कार्य करने की गति बढ़ा दी।लेकिन आज वह ख़ुद लंग्स कैंसर से पीड़ित हैं और शहर के जनप्रतिनिधियों को उनकी सुध लेने की फुर्सत नहीं है।

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