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पात्रा के सामने चुनौती सर्जिकल स्ट्राइक की | Challenge of Surgical Strike in front of Sambit Patra

Posted on: 03 Apr 2019 12:07 by Surbhi Bhawsar
पात्रा के सामने चुनौती सर्जिकल स्ट्राइक की | Challenge of Surgical Strike in front of Sambit Patra

टीवी चैनलों पर चलने वाली बहस में वैचारिक तीक्ष्णता से विरोधियों को परास्त करने वाले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा के सामने मैदानी चुनावी राजनीति में सर्जिकल स्ट्राइक कर विजय हासिल करने की है। बहुत कम लोग जानते हैं कि राजनीतिक बहस का यह डॉक्टर वास्तव में सर्जन है और बतौर डॉक्टर नौकरी भी कर चुका है। संयोग से उन्हें ऐसी लोकसभा सीट पार्टी ने उपलब्ध कराई है जहां कभी कमल खिला ही नहीं।

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पुरी लोकसभा सीट से 1991 में जनता दल से ब्रजकिशोर त्रिपाठी चुने गए थे। वे ही 1998, 1999 और 2004 में बीजू जनता दल से पुरी लोकसभा क्षेत्र से सांसद चने गए। इस बीच 1996 में कांग्रेस से पिनाकी मिश्रा चुनाव जीते। बाद में 2001 व 2014 में वे बीजू जनता दल से निर्वाचित होकर संसद में पहुंचे। इससे पहले इस सीट से कभी वामपंथी दिग्गज चिंतामणी पाणिग्रही (जो बाद में कांग्रेसी हो गए) संसद में पहुंचे तो कभी रवि राय जो लोकसभा के स्पीकर भी बने।

बहरहाल, राजनीतिक अतीत पात्रा की कोई मदद करता नजर नहीं आता। अब सवाल उठता है मोदी लहर और उनके व्यक्तित्व का। लहर का फैसला तो आने वाला समयम करेगा, लेकिन व्यक्तित्वव का जादू बहुत चल सकेगा, इसमें संदेह है, क्योंकि आजादी के बाद से यहां से निर्वाचित ज्यादातर सांसद ब्राह्मण रहे हैं और पात्रा का कार्यक्षेत्र पिछड़ों व आरक्षित वर्ग को उसके अधिकार दिलाना है। वे डॉक्टरों व पुलिस वालों का एक एनजीओ स्वराज भी चलाते हैं।

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दिल्ली सरकारर के जाति प्रमाण पत्रों से सफाईकर्मी और जूता सुधाररने वालों के जातिसूचक शब्द हटवाने का श्रेय उनके खाते में है। इस बार के चुनाव में उनका मुकाबला बीजू जनता दल के सांसद पिनाकी मिश्रा और कांग्रेस के मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सत्यप्रकाश नायक से होगा। चुनावी नतीजा जो भी हो पात्रा जिस तरह से अमित शाह के प्रिय पात्र हैं, उसे देख लगता है कि अरुण जेटली या स्मृति ईरानी की तरह चुनाव के बाद उनका राजनीतिक पुनर्वास तो तय जैसा ही है।

@जोग लिखी

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