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सीबीआई विवाद : कोर्ट ने सरकार से पूछा, वर्मा को रात में क्यों हटाया

Posted on: 06 Dec 2018 12:57 by Rakesh Saini
सीबीआई विवाद : कोर्ट ने सरकार से पूछा, वर्मा को रात में क्यों हटाया

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को उनके पद से हटाने और उन्हें छुट्टी पर भेजने के सरकार के फैसल के खिलाफ उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने कहा, सीबीआई के दो वरिष्ठ ​अधिकारियों के बीच लड़ाई एक रात में शुरू नहीं हुई। ऐसे में सरकार ने चयन समिति से जानकारी लिए बिना कैसे सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को उनकी शक्तियों से वंचित कर दिया।

न्यायमूर्ति गोगोई ने महाधिवक्ता तुषार मेहता से कहा, ‘सरकार को निष्पक्ष होना चाहिए। आलोक वर्मा से उनकी शक्तियां छीनने से पहले सरकार को चयन समिति से परामर्श लेने में क्या दिक्कत थी? हर सरकार की कार्रवाई की भावना संस्थान के हित में होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि महाधिवक्ता ने उसे बताया है कि इस स्थिति के पीछे के हालात जुलाई में बने थे।

न्यायमूर्ति गोगोई ने मेहता से पूछा, ‘सरकार ने 23 अक्तूबर को सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा से सारी शक्तियां छीनने का रातोंरात निर्णय लेने के लिए किसने प्रेरित किया? जब वर्मा कुछ महीनों बाद सेवानिवृत्त हो रहे थे तो सरकार ने कुछ महीनों का और इंतजार क्यों नहीं किया और चयनित समिति से परामर्श क्यों नहीं लिया गया?’महाधिवक्ता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि सीवीसी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि एक असाधारण स्थिति पैदा हो गई थी और असाधारण परिस्थितियों के लिए कभी-कभी असाधारण उपचार की जरूरत होती है।

महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया, ‘असाधारण परिस्थितियां उभर गई थीं। सीवीसी जांच का आदेश निष्पक्ष रूप से पारित किया गया था। दोनों वरिष्ठ अधिकारी लड़ रहे थे और गंभीर मसलों की जांच करने की बजाए एक-दूसरे के खिलाफ मामले की जांच कर रहे थे। सीवीसी की उपेक्षा करना कर्तव्य का अपमान होगा।’

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