सावधान! ट्रैफिक जाम दे रहा एड़ी और कमर का दर्द

लगातार सामने देखने के चलते गर्दन का दर्द भी लोगों प्रमुख समस्या बनता जा रहा है। लोग भी अब इसके आदि भी बनते जा रहे हैं।

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ड्राइविंग करने वाले लोगों को कमर दर्द, गर्दन में दर्द, एडिय़ों और पैरों में दर्द आम हो गया है, लेकिन यह दर्द केवल ड्राइविंग के कारण नहीं है। यह दर्द उनको ज्यादा परेशान कर रहा है कि जो घंटों के जाम में ड्राइव करके घर से ऑफिस और ऑफिस से घर का सफर तय करते हैं।जाम के चलते कुछ समय का रास्ता भी कई घंटों में तय होता है। ऐसे में काफी समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने, बार-बार क्लच व ब्रेक मारने से धीरे-धीरे ही सही, लेकिन इसका असर सेहत पर पडऩे लगता है।

लोगों में इससे पैर और एडिय़ों में दर्द की समस्या आम हो गई है। कई मामलों में कमर दर्द की शिकायत भी सामने आई है। लगातार सामने देखने के चलते गर्दन का दर्द भी लोगों प्रमुख समस्या बनता जा रहा है। लोग भी अब इसके आदि भी बनते जा रहे हैं। शुरुआत में वह समझ भी नहीं पाते, लेकिन बाद में यह बड़ी समस्या के रूप में सामने आती है। यह दिक्कत अब 20 से 40 वर्ष के युवाओं में आ रही है। लोग कहते हैं कि ड्राइविंग जीवनशैली का एक हिस्सा बन चुकी है इसलिए इसे छोडऩा संभव नहीं है।

रूहृष्ट में कार्यरत सुमित रोजाना गुडग़ांव से नोएडा जाते हैं। उन्होंने बताया कि वह साढ़े 3 से 4 घंटे रोजाना ड्राइव करते हैं। जाम में समय बढ़ता है। इससे अब पैरों में दर्द होता है। प्राइवेट फर्म में काम करने वालीं सुकृति ठाकुर का कहना है कि घर से ऑफिस की दूरी 20 किलोमीटर की है, लेकिन इस दूरी को तय करने में कभी डेढ़ से पौने दो घंटे लग जाते हैं। ऐसे में कमर दर्द की परेशानी उन्हें धीरे-धीरे होने लगी है।

ट्रैफिक में ड्राइव करने से बढ़ रही परेशानी

फोर्टिस हॉस्पिटल के आर्थोपेडिक डॉ. जयंत अरोड़ा ने बताया कि लॉन्ग ड्राइविंग परेशानी का कारण नहीं है, लेकिन कुछ किलोमीटर की दूरी को ट्रैफिक के साथ पार करना परेशानी का सबब बन रहा है। जाम में लगातार ड्राइविंग करने से हाथों और गर्दन का दर्द सर्वाइकल का रूप ले सकता है। वहीं, लगातार एक स्थिति में बैठे रहते से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन स्लो पड़ जाता है। जिसके कारण ब्लड प्रेशर बढऩे लगता है।

मानसिक रूप से भी पढ़ रहा प्रभाव

शोर और ट्रैफिक के बीच सफर करने से लोगों पर मानसिक असर भी पड़ रहा है। चिड़चिड़ापन आम हो गया है, जिसका असर काम पर होता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह पर दें ध्यान

गुडग़ांव के सिविल हॉस्पिटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ पंकज अग्रवाल कहते हैं, च्कार की सीट को ठीक से एडजस्ट कर के बैठने से पीठ का पोस्चर सही रहता है, जिससे रीढ़ पर कम तनाव पड़ता है। वहीं जीवनशैली को बदलना भी बहुत जरुरी है।

योग एक्सपर्ट पूनम बिमरा का कहना है, च्एक्सर्साइज से इन समस्याओं से बचा जा सकता है। ड्राइविंग के दौरान बीच-बीच में शरीर को स्ट्रेच कर तनाव को कम किया जा सकता है। हालांकि, समस्या गंभीर है तो डॉक्टर से जरूर मिलें।ज्

ऐसे पा सकते हैं राहत

  • कारपूलिंग से शरीर को आराम दिया जा सकता है।
  • नियमित रूप से एक्सर्साइज, स्ट्रेचिंग और रनिंग।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग ज्यादा सही है।
  • ड्राइविंग के दौरान बीच-बीच में बॉडी को स्ट्रैच जरूर करें।
  • कमर और गर्दन को सही पोस्चर रखने पर कम होगी परेशानी।

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