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मकड़ी के जाले के रेशे से बनेगा कैंसर का टीका

Posted on: 16 Jun 2018 10:11 by hemlata lovanshi
मकड़ी के जाले के रेशे से बनेगा कैंसर का टीका

नई दिल्ली: आज भी कई रोग ऐसे हैं जिन्हे पूरी तरह से खत्म करने की कोई मेडिसिन नही है। इन्हीं रोगों में कैंसर भी है। कैंसर पर विजय पाने के लिए वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। इन्हीं शोधों में अब एक अच्छी खबर मिली है। वैज्ञनिकों ने मकड़ी के जाले के रेशे से बने ऐसे माइक्रो कैप्सूल विकसित किए हैं जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं तक सीधे कैंसर वैक्सिन को पहुचं सकते हैं।

कैंसर से लड़ाई के लिए शोधकर्ता इस तरह की वैक्सिन का इस्तेमाल करते हैं जो रोग प्रतिरोधक प्रणाली को सक्रिय कर सके और ट्यूमर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट कर सके। प्रतिरक्षा तंत्र से जैसी प्रतिक्रिया की उम्मीद होती है, वैसी हमेशा मिल नहीं पाती।

प्रतिरक्षा प्रणाली और खासकर कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने वाली टी लिम्फोसाइट कोशिकाओं पर वैक्सिन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए शोधकर्ताओं ने मकड़ी के जाले के रेशे से निर्मित माइक्रो कैप्सूल बनाए हैं जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं के केन्द्र तक सीधे वैक्सिन को पहुंचाने में सक्षम हैं।

इस किस्म के माइक्रो कैप्सलू यूनिवर्सिटी आॅफ फ्रीबर्ग और लुडविक मैक्जिमिलियान यूनिवर्सिटी, म्यूनिख के शोधकर्ताओं ने विकसित किए हैं। हमारी रोग-प्रतिरोधक प्रणाली में मोटे तौर पर दो तरह की कोशिकांए होती हैं।

एक बी लिम्फोसाइट जो विभिन्न संक्रमणों से लड़ाई के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं। दूसरी कोशिकाएं हैं टी लिम्फोसाइट। कैंसर के अलावा टीबी जैसे कुछ संक्रामक रोगों के मामलों में टी लिम्फोसाइट को सक्रिय करने की जरूरत होती है।

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